Special UP TET 2026: गणित और बाल मनोविज्ञान के कठिन सवालों में उलझे शिक्षक, प्रश्नपत्र पर उठे सवाल
Special UP TET 2026: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने मंगलवार को प्रदेश के छह मंडल मुख्यालयों में स्पेशल टीईटी यानी विशिष्ट शिक्षक पात्रता परीक्षा कराई. परीक्षा के लिए पूरे प्रदेश में 131 केंद्र बनाए गए थे, जबकि प्रयागराज में 22 केंद्रों पर अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी.
पेपर देने वाले शिक्षकों ने बताया कि गणित, पर्यावरण और बाल मनोविज्ञान से जुड़े कई सवाल कठिन लगे. परीक्षा में दोनों पालियों को मिलाकर 87.92 प्रतिशत अभ्यर्थी शामिल हुए. आयोग ने परीक्षा की निगरानी एआई आधारित कैमरों और कंट्रोल कमांड सेंटर से कराई. कड़ी निगरानी रही.
बाल मनोविज्ञान और शिक्षण विधि के सवालों ने उलझाया
परीक्षा में बाल विकास और शिक्षण विधि वाले हिस्से से कई सवाल पूछे गए, जिनमें अभ्यर्थियों को उलझन हुई. ब्रेल लिपि में इस्तेमाल होने वाली चीज, टीएलएम का पूरा नाम, पावलव के प्रयोग में भोजन से होने वाली स्वाभाविक प्रतिक्रिया और संज्ञान का अर्थ पूछा गया. इसके अलावा बच्चे के गणित हल करने के अलग-अलग तरीकों, मानसिक विकास, परामर्श, सीखने के उतार-चढ़ाव, सामाजिक समावेश और अभिप्रेरणा से जुड़े प्रश्न भी आए. शिक्षकों के अनुसार इन सवालों ने तैयारी की कठिन परीक्षा ली. इन विषयों पर अभ्यर्थियों की समझ परखी गई.
हिंदी और अंग्रेजी के प्रश्न भी रहे चुनौतीपूर्ण
हिंदी और अंग्रेजी के प्रश्नों को लेकर भी अभ्यर्थियों ने कहा कि पेपर उनकी उम्मीद से अलग था. हिंदी में आगरा का बहुवचन, अधोगति और पवन का संधि विच्छेद, ध्वनि तथा वर्ण का अंतर, पंचवटी खंड काव्य के रचयिता और स्वर-व्यंजन से जुड़े सवाल पूछे गए. नील और घोड़ा शब्दों में मात्रा तथा श्र वर्ण की बनावट पर भी प्रश्न थे. अंग्रेजी के सवाल भी कई परीक्षार्थियों को कठिन लगे. इस वजह से परीक्षा केंद्रों से बाहर निकले शिक्षकों ने पेपर पर चर्चा की. समय प्रबंधन भी चुनौती बना.
शिक्षक संगठन ने प्रश्नपत्र के स्तर पर जताई नाराजगी
विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश ने परीक्षा के प्रश्नपत्र पर आपत्ति जताई है. संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि विभागीय परीक्षा का मकसद शिक्षकों की योग्यता और ज्ञान का सही आकलन करना होना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रश्न ऐसे नहीं होने चाहिए, जिनसे शिक्षकों पर बिना वजह मानसिक दबाव बने. एसोसिएशन ने कठिन सवालों को लेकर नाराजगी जताई और परीक्षा के उद्देश्य पर ध्यान देने की बात कही. संगठन के मुताबिक मूल्यांकन व्यावहारिक और शिक्षण से जुड़ा होना चाहिए. शिक्षकों ने इस पर सवाल उठाए.
दोनों पालियों में 87.92 प्रतिशत अभ्यर्थी हुए शामिल
आयोग के आंकड़ों के अनुसार पहली पाली में कक्षा एक से पांच तक के लिए 58,353 अभ्यर्थी पंजीकृत थे. इनमें से 50,666 यानी 86.8 प्रतिशत परीक्षा में शामिल हुए. दूसरी पाली में कक्षा छह से आठ तक के लिए 48,194 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें 43,015 यानी 89.25 प्रतिशत उपस्थित रहे. दोनों पालियों को मिलाकर कुल 93,681 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जो पंजीकृत संख्या का 87.92 प्रतिशत है. महिला उपस्थिति 89.25 और पुरुष उपस्थिति 89.28 प्रतिशत दर्ज की गई. पंजीकृत संख्या के मुकाबले उपस्थिति इसी स्तर पर दर्ज हुई.
एआई कैमरों से हुई निगरानी, लखनऊ में फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया
आयोग के उप सचिव संजय सिंह के मुताबिक परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर, मेरठ और आगरा मंडलों में हुई. पहली पाली सुबह 9:30 से दोपहर 12 बजे और दूसरी पाली 2:30 से शाम 5 बजे तक चली. एआई इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड सेंटर से अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार, सदस्य, सचिव, परीक्षा नियंत्रक और उपसचिव ने केंद्रों की निगरानी की. लखनऊ के बप्पा श्री नारायण वोकेशनल इंटर कॉलेज में दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा दे रहा एक फर्जी परीक्षार्थी पकड़ा गया और पुलिस को सौंपा गया. परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई.
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