सरकार बदलने जा रही है पेंशन सिस्टम, NPS में मिलेगी इस चीज की गारंटी, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?

सरकार बदलने जा रही है पेंशन सिस्टम, NPS में मिलेगी इस चीज की गारंटी, जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर?

रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए पेंशन बहुत बड़ा सपोर्ट होती है. ज्यादातर लोगों के बुढापे का सहारा भी यही पेंशन होती है. इसलिए लोग नौकरी रहते हुए ऐसी स्कीम में पैसा लगाते हैं, जो हर महीने पेंशन के तौर पर एक फिक्स्ड इनकम दे.

सरकारी कर्मचारियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) है. इन दोनों में से वो किसी एक सिस्टम में भी बने रह सकते हैं. वहीं,प्राइवेट कर्मचारी भी NPS अकाउंट खोल सकते हैं. पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) अब आपके पेंशन सिस्टम में बदलाव करने जा रहा है. PFRDA बहुत जल्द NPS में एक नया नियम लाने की तैयारी कर रही है. इसमें सब्सक्राइबर्स को एक तय मिनिमम रिटर्न (गारंटीड रिटर्न) का भरोसा मिलेगा.


आइए जानते हैं आने वाले समय में पेंशन सिस्टम में क्या-क्या बदलाव होंगे? NPS अकाउंट होल्डर के लिए क्या बदल जाएगा? पेंशन सिस्टम में बदलाव होने से आपकी जेब पर क्या और कितना असर पड़ेगा?

क्या है सरकार का प्लान?

दरअसल, पेंशन फंड रेगुलेटर (PFRDA) ने NPS के तहत 'सुनिश्चित पेंशन' की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है.PFRDA ने NPS के तहत फिक्स्ड पेआउट तय करने के लिए एक हाई-लेवल कमिटी बनाई है. इसका सीधा मकसद यह है कि रिटायरमेंट के बाद आपकी जेब खाली न रहे और आपको एक तय रकम मिलती रहे. सीधे शब्दों में कहे, तो अगर फिक्स्ड पेंशन की गारंटी मिलती है, तो आपका कॉन्ट्रिब्यूशन भी बढ़ सकता है.

जनता से मांगे जाएंगे सुझाव

PFRDA के चेयरमैन दीपक मोहंती ने बताया कि मिनिमम एश्योर्ड रिटर्न स्कीम की रूपरेखा तय करने के लिए कमिटी को आम जनता के सुझावों और कमेंट्स के लिए ओपन किया जाएगा. इसका मकसद एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करना है, जो पेंशन फंड्स के लिए सस्टेनेबल हो.साथ में सब्सक्राइबर्स को रिटर्न की गारंटी दे सके.

मार्केट लिंक से अलग होगी स्कीम

मौजूदा NPS का स्ट्रक्चर पूरी तरह से एक मार्केट-लिंक्ड है. यानी NPS के निवेश पर आपको मिलने वाला रिटर्न बाजार के उतार-चढ़ाव, इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी सिक्योरिटी के परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है. ज्यादातर मामलों में लॉन्ग टर्म में NPS ने अच्छे रिटर्न दिए हैं. फिर भी कई निवेशक ऐसे हैं, जो फिक्स्ड रिटर्न चाहते हैं. कमिटी इन्हीं लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के इरादे से बनाई गई है.

2004 में लॉन्च हुआ था NPS

NPS एक स्कीम है, जिसे भारत सरकार ने साल 2004 में लॉन्च किया था. इसका मकसद लोगों को रिटायरमेंट के बाद एक स्थायी और भरोसेमंद इनकम देना है. इस स्कीम को पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) रेगुलेट करती है. शुरुआत में यह सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए थी, लेकिन 2009 में इसे सभी भारतीय नागरिकों के लिए खोल दिया गया.

NPS के फायदे

  • इससे रिटायरमेंट फंड जमा होता है.
  • सालाना 2 लाख रुपये तक की टैक्स रिलीफ मिलती है.
  • इसमें EPF और PPF से ज्यादा रिटर्न मिलने की गुंजाइश रहती है.
  • ये पेंशन रेगुलेटरी अथॉरिटी की ओर से सेफ रहती है.
  • दूसरे इंवेस्टमेंट ऑप्शन के मुकाबले चार्जेज कम होते हैं, जिससे आपको लंबे समय में ज्यादा रिटर्न मिलता है.
  • जब आप 60 साल के हो जाते हैं, तो इसके तहत 60% पैसा टैक्स-फ्री निकल सकता है.
  • वहीं, 40% पैसा पेंशन के लिए इस्तेमाल होता है, जिससे आपको हर महीने एक फिक्स इनकम मिलती है.

कैसे मिलती है पेंशन?

इस स्कीम में निवेश करने वाला व्यक्ति हर महीने या सालाना एक तय रकम जमा करता है. यह पैसा प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स की ओर से शेयर मार्केट, सरकारी बॉन्ड और दूसरे फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश किया जाता है. जब निवेशक की उम्र 60 साल होती है, तो उसे जमा रकम का एक हिस्सा लम्पसम (एकमुश्त) मिल जाता है. बाकी रकम से उसे हर महीने पेंशन मिलती रहती है.

NPS से जुड़े एग्जिट और विड्रॉल रूल्स में बदलाव

सरकार ने दिसंबर में ही NPS से जुड़े एग्जिट और विड्रॉल रूल्स में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसे पेंशन रेगुलेटर Pension Fund Regulatory and Development Authority (PFRDA) ने अप्लाई किया है. ये नए रूल खास तौर पर नॉन-गवर्नमेंट सब्सक्राइबर्स पर अप्लाई होते हैं. जैसे ऑल सिटिजन मॉडल और कॉरपोरेट NPS. सबसे बड़ा चेंज यह है कि रिटायरमेंट के समय एन्युटी यानी पेंशन में जरूरी इन्वेस्टमेंट की लिमिट को 40% से घटाकर 20% कर दिया गया है. इसका सीधा सा मतलब है कि अब आप अपने NPS कॉर्पस का 80% तक हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं. कुछ खास मामलों में पूरी 100% राशि निकालने की भी छूट मिल सकती है.

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