बजट 2026: नए टैक्स रिजीम में होम लोन और मेडिकल इंश्योरेंस भी शामिल हों तो कितना फायदा? जानिए
Budget 2026 Income Tax: भारत सरकार द्वारा फरवरी 2026 में पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं. खासतौर पर नई टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को और आकर्षक बनाने के लिए होम लोन की ब्याज छूट और मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर डिडक्शन को शामिल करने की संभावनाओं पर जोरदार चर्चा चल रही है.
वर्तमान में नए रिजीम में ज्यादातर डिडक्शन्स उपलब्ध नहीं हैं, जिसकी वजह से कई टैक्सपेयर्स पुराने रिजीम को प्राथमिकता देते हैं. लेकिन अगर ये बदलाव लागू होते हैं, तो मिडल क्लास को बड़ी राहत मिल सकती है.
द इकोनॉमिक टाइम्स में कई रिपोर्ट्स में एक्सपर्ट्स ने सेक्शन 80D को नई रिजीम में शामिल करने की मांग की है. नियती शाह (चार्टर्ड अकाउंटेंट और 1 Finance की पर्सनल टैक्स हेड) ने कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर कैप्ड डिडक्शन (25,000-50,000 रुपये) दी जाए, क्योंकि मेडिकल इन्फ्लेशन 12-14 फीसदी सालाना है. विश्वानाथन अय्यर (ग्रेट लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट चेन्नई के सीनियर एसोसिएट प्रोफेसर) ने अनुमान लगाया कि 15 लाख इनकम वाले के लिए 1 लाख स्टैंडर्ड डिडक्शन या हेल्थ इंश्योरेंस कैप्ड डिडक्शन से टैक्स में करीब 4,000 रुपये की बचत हो सकती है. एक अन्य रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने सेक्शन 80D को दोनों रिजीम्स में उपलब्ध कराने और सीनियर्स के लिए लिमिट बढ़ाने की सिफारिश की.
हेल्थ इंश्योरेंस ज्यादा अफोर्डेबल बनाने की उम्मीद
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट में नियती शाह के हवाले से लिखा गया है कि हेल्थकेयर, हाउसिंग और रिटायरमेंट पर फोकस करते हुए कहा कि हेल्थ इंश्योरेंस पर 25,000-50,000 की कैप्ड डिडक्शन और होम लोन या HRA से जुड़ी सरल फ्लैट डिडक्शन दी जाए. एसआर पटनायक (Cyril Amarchand Mangaldas के पार्टनर और टैक्सेशन हेड) ने सुझाव दिया कि सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट पर हायर इंटरेस्ट डिडक्शन और 30 फीसदी टैक्स स्लैब थ्रेशोल्ड बढ़ाया जाए. फाइनेंशियल एक्सप्रेस और अपस्टॉक्स की रिपोर्टस में अभिषेक सोनी जैसे एक्सपर्ट्स ने होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को 2 लाख से 3 लाख तक बढ़ाने की बात कही, क्योंकि प्रॉपर्टी प्राइस और EMI बढ़ गई हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट ऑफ इंडिया (ICAI) ने प्री-बजट मेमोरेंडम में सेक्शन 80D डिडक्शन को नए रिजीम में शामिल करने की सिफारिश की है, ताकि हेल्थ इंश्योरेंस ज्यादा अफोर्डेबल बने.
अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी बेनिफिट्स
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी इस मुद्दे पर खूब चर्चा है. फाइनेंशियल एक्सपर्ट सुमित कपूर (@moneygurusumit) ने पोस्ट किया कि बजट 2026 में 80D हेल्थ इंश्योरेंस डिडक्शन नई रिजीम में वापस आ सकता है और होम लोन पर आंशिक डिडक्शंस की अनुमति दी जा सकती है, जिससे प्रभावी टैक्स-फ्री इनकम 17 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. सीए हिमांक सिंगला (@CAHimankSingla) ने भी इसी तरह की खबर शेयर की, जिसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन 1-1.5 लाख, 80D डिडक्शन और होम लोन बेनिफिट्स का जिक्र है. जर्नलिस्ट निनाद शेठ ने लिखा कि बजट में होम लोन पर बड़ी इंटरेस्ट डिडक्शन और अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए जीएसटी बेनिफिट्स लगभग निश्चित हैं, जो मिडल क्लास की मांगों को ध्यान में रखते हुए ईएमआई कम कर सकते हैं.
इसके अलावा फाइनेंशियल एक्सप्रेस ने पुरानी रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट रिबेट को 5 लाख तक बढ़ाने की संभावना जताई. लोन्स जगत (@loansjagat) ने होम लोन रिलीफ को 2 लाख से 5 लाख तक बढ़ाने की उम्मीद जताई.
कड़क (@itskadak) ने हिंदी में पोस्ट किया कि बजट 2026 में नई टैक्स रिजीम गेम-चेंजर बन सकती है, जिसमें एचआरए और हेल्थ इंश्योरेंस शामिल होने की चर्चा है, साथ ही होम लोन और एजुकेशन लोन पर राहत. कुल मिलाकर, सोशल मीडिया पर मिडल क्लास की राहत की मांग जोरों पर है, और ये चर्चाएं मीडिया रिपोर्ट्स से मेल खाती हैं.
अगर ऐसा हुआ तो टैक्सपेयर्स को कैसे और कितना फायदा?
वर्तमान में नए टैक्स रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं है, लेकिन टैक्स रेट्स कम हैं. उदाहरण के लिए - 15 लाख तक की इनकम पर प्रभावी टैक्स कम है. पुराने रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख तक (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये (सेक्शन 80D, सीनियर्स के लिए 50,000) की डिडक्शन है. अगर ये नए रिजीम में शामिल होते हैं, तो टैक्सपेयर्स कम रेट्स का फायदा लेते हुए भी डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे.
कैसे होगा फायदा?
वर्तमान में नए टैक्स रिजीम में कोई डिडक्शन नहीं है, लेकिन टैक्स रेट्स कम हैं. उदाहरण के लिए 15 लाख तक की इनकम पर प्रभावी टैक्स कम है. पुराने रिजीम में होम लोन इंटरेस्ट पर 2 लाख तक (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस पर 25,000 रुपये (सेक्शन 80D, सीनियर्स के लिए 50,000) की डिडक्शन है. अगर ये नए रिजीम में शामिल होते हैं, तो टैक्सपेयर्स कम रेट्स का फायदा लेते हुए भी डिडक्शन क्लेम कर सकेंगे.
होम लोन
अगर 2 लाख इंटरेस्ट डिडक्शन मिलती है, तो टैक्सेबल इनकम 2 लाख कम हो जाएगी. 30% स्लैब में यह 60,000 रुपये की टैक्स सेविंग देगी. अगर लिमिट 5 लाख तक बढ़ी (जैसी कि चर्चा है), तो सेविंग 1.5 लाख रुपये तक हो सकती है. मेडिकल इंश्योरेंस: 25,000 रुपये की डिडक्शन पर 30 प्रतिशत स्लैब में 7,500 रुपये की सेविंग. सीनियर्स के लिए 50,000 पर 15,000 रुपये. अगर स्टैंडर्ड डिडक्शन (75,000) के साथ ये जोड़े जाएं, तो 15 लाख इनकम वाला व्यक्ति 12 लाख तक टैक्स-फ्री रह सकता है, और बाकी पर कम रेट्स लागू होंगे. चर्चाओं के मुताबिक, प्रभावी टैक्स-फ्री लिमिट 17 लाख तक पहुंच सकती है.
मान लीजिए आपकी सालाना इनकम 15 लाख है. नए रिजीम में वर्तमान टैक्स लगभग 1.56 लाख (रिबेट के बाद) रुपये बनता है. अगर 2 लाख होम लोन + 25,000 इंश्योरेंस डिडक्शन मिले, तो टैक्सेबल इनकम 12.75 लाख हो जाएगी, और टैक्स घटकर 1.17 लाख रह सकता है, यानी 39,000 रुपये की सेविंग होगी. हाई इनकम (20 लाख) पर सेविंग और ज्यादा होगी (30 प्रतिशत स्लैब में 2.25 लाख डिडक्शंस से 67,500 रुपये की बचत होगी.
फिलहाल, नए टैक्स रिजीम में अभी तक होम लोन इंटरेस्ट (सेक्शन 24(b)) और मेडिकल इंश्योरेंस (सेक्शन 80D) जैसी डिडक्शन नहीं मिलती हैं. ये पुराने रिजीम में ही उपलब्ध हैं. स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये नए रिजीम में सैलरीड लोगों को मिलता है. वर्तमान में (FY 2025-26 यानी AY 2026-27) नए रिजीम के स्लैब ऐसे हैं: 4 लाख तक जीरो, 4-8 लाख 5%, 8-12 लाख 10%, 12-16 लाख 15%, 16-20 लाख 20%, 20-24 लाख 25%, 24 लाख से ऊपर 30%. रिबेट सेक्शन 87A के तहत ज्यादा है जिससे 12 लाख तक इनकम टैक्स-फ्री हो जाती है, स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ 12.75 लाख तक.
15 लाख इनकम पर नए रिजीम में टैक्स कैलकुलेशन करीब 1.56 लाख के आसपास ही है (स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद), जो सही लगता है. अगर डिडक्शन जोड़े जाते हैं तो सेविंग 39,000 जैसी हो सकती है. लेकिन अभी बजट 2026 में ये बदलाव नहीं हुए हैं, ये सिर्फ उम्मीदें और एक्सपर्ट्स की चर्चाएं हैं. कई एक्सपर्ट कह रहे हैं कि बजट में नए रिजीम में लिमिटेड डिडक्शन जैसे होम लोन इंटरेस्ट या मेडिकल इंश्योरेंस को शामिल किया जा सकता है ताकि लोग ज्यादा फायदा लें.
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