लखनऊ। समायोजन 3.0 को लेकर प्रदेशभर में शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। वर्तमान परिस्थितियों में यदि न्यायिक हस्तक्षेप के माध्यम से राहत प्राप्त करने की संभावनाओं का विधिक विश्लेषण किया जाए, तो प्रचलित तथ्यों और पूर्ववर्ती न्यायिक आदेशों के आलोक में कुछ परिस्थितियां स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इन आधारों पर शिक्षक न्यायालय में प्रभावी रूप से अपना पक्ष रख सकते हैं।
1️⃣ जूनियर शिक्षकों का समायोजन: स्पष्ट रूप से अवैध
कई जनपदों में जूनियर शिक्षकों का समायोजन किया गया है, जबकि इससे पूर्व माननीय उच्च न्यायालय द्वारा जूनियर शिक्षकों के समायोजन को विधि-विरुद्ध (Illegal) घोषित करते हुए निरस्त किया जा चुका है।
ऐसी स्थिति में समायोजन 3.0 के अंतर्गत समायोजित जूनियर शिक्षक न्यायालय से स्थगन (Stay) अथवा निरस्तीकरण की राहत प्राप्त करने के पूर्णतः पात्र माने जा रहे हैं।
2️⃣ सीनियर शिक्षकों का समायोजन: सहमति के बिना वैध नहीं
कतिपय जनपदों में सीनियर शिक्षकों का भी समायोजन किया गया है।
हालांकि, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा नियमावली, 1981 के अनुसार किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण या समायोजन उसकी स्पष्ट एवं लिखित सहमति के बिना वैधानिक रूप से अनुमन्य नहीं है।
इस आधार पर सीनियर शिक्षक न्यायालय के समक्ष राहत हेतु याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं।
हालांकि, इस विषय में अंतिम निर्णय माननीय न्यायालय के न्यायिक विवेक पर निर्भर करेगा।
3️⃣ AT UPS से HT PS पदोन्नत शिक्षकों का समायोजन: सेवा हित के प्रतिकूल
ऐसे शिक्षक जिनका पद AT UPS से HT PS में पदोन्नत किया गया है और जिनका समायोजन इसी प्रक्रिया में कर दिया गया है—यदि संबंधित विद्यालय के UPS में उनके विषय का कोई अन्य शिक्षक शेष नहीं है, तो ऐसा समायोजन—सेवा-हित के प्रतिकूल और शैक्षणिक आवश्यकता के विरुद्ध माना जाएगा।
ऐसे मामलों में न्यायालय से राहत मिलने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है। इसके अतिरिक्त, इस श्रेणी में अन्य सहायक विधिक आधार भी उपलब्ध बताए जा रहे हैं।
4️⃣ HT PRIMARY के समायोजन पर पहले से ही रोक
HT PRIMARY के समायोजन के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ द्वारा पूर्व से ही स्थगन आदेश (Stay Order) प्रभावी है।
इस कारण HT PRIMARY के अंतर्गत किए गए समायोज न्यायालय के आदेशाधीन हैं और संबंधित शिक्षकों को इस आधार पर निश्चित रूप से राहत प्राप्त होगी
निष्कर्ष
समायोजन 3.0 के तहत किए गए सभी समायोजन समान रूप से वैध नहीं हैं।
जूनियर शिक्षक, HT PRIMARY, तथा विशेष परिस्थितियों वाले पदोन्नत शिक्षक मजबूत कानूनी आधार पर न्यायालय की शरण ले सकते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रभावित शिक्षक अपने दस्तावेज सुरक्षित रखें और समय रहते विधिक सलाह लेकर उचित मंच पर कार्यवाही करें। यदि आप समायोजन 3.0 से प्रभावित हैं, तो इस जानकारी को अन्य शिक्षकों के साथ जरूर साझा करें।

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