यूपी के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों का होगा मूल्यांकन, गुणवत्ता सुधारने के लिए लागू होगा स्कूल क्वालिटी असेसमेंट फ्रेमवर्क
UP School Assessment: राजकीय बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों की पढ़ाई, संसाधनों और शैक्षिक गुणवत्ता का होगा आकलन, एससीईआरटी ने तैयार किया नया मूल्यांकन ढांचा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजकीय बेसिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया जा रहा है। अब प्रदेश के सरकारी विद्यालयों का मूल्यांकन उनकी पढ़ाई, उपलब्ध संसाधनों और शैक्षिक गतिविधियों के आधार पर किया जाएगा। इसके माध्यम से यह आकलन किया जाएगा कि विद्यालयों में शिक्षा का स्तर कैसा है और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
इसके लिए स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क (SQAAF) लागू करने की तैयारी की जा रही है। इसका उद्देश्य विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देना और शैक्षिक व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
एससीईआरटी ने तैयार किया मूल्यांकन ढांचा
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) की ओर से स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन फ्रेमवर्क (SQAAF) को अंतिम रूप दिया जा रहा है।
इस व्यवस्था के लागू होने के बाद विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक स्कूल का नियमित मूल्यांकन होगा।
प्रधानाध्यापक भरेंगे विद्यालय की रिपोर्ट
विद्यालयों का मूल्यांकन निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाएगा। प्रधानाध्यापक अपने-अपने विद्यालय की रिपोर्ट तैयार कर एससीईआरटी के निर्धारित पोर्टल पर भरेंगे। इसके बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विद्यालयों का मूल्यांकन और ग्रेडिंग की जाएगी।
अच्छे प्रदर्शन वाले स्कूलों को मिलेगा प्रोत्साहन
इस मूल्यांकन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यालयों को श्रेष्ठ नवाचारों के रूप में दूसरे स्कूलों में भी लागू किया जाएगा, ताकि अन्य विद्यालय भी उनसे सीख सकें।
वहीं जिन विद्यालयों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं होगा, वहां सुधार के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे।
कमजोर विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने पर जोर
शिक्षा विभाग का उद्देश्य केवल विद्यालयों की ग्रेडिंग करना नहीं, बल्कि उनकी कमियों की पहचान कर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इसके लिए एससीईआरटी की मदद से विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शैक्षिक व्यवस्था विकसित की जाएगी।
ग्रेडिंग के बाद विद्यालयों को यह भी बताया जाएगा कि वे किस प्रकार अपनी कमियों को दूर कर शैक्षिक स्तर में सुधार कर सकते हैं।
इस पहल से प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता, संसाधनों के उपयोग और शैक्षिक गतिविधियों की नियमित समीक्षा का रास्ता तैयार होगा।
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