लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने और मोबाइल के बढ़ते उपयोग को कम करने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग ने नया ‘ड्रॉप एवरीथिंग एंड रीड (DEAR)’ अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी स्कूलों में सप्ताह में एक दिन 30 मिनट तक बच्चों को पाठ्यपुस्तकों के अलावा अपनी पसंद की किताबें, कहानियां, कविताएं और अन्य साहित्य पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पढ़ने की संस्कृति विकसित करने पर जोर
अभियान के तहत विद्यालयों की समय-सारिणी में पुस्तकालय के लिए विशेष समय (कालांश) निर्धारित किया जाएगा। इस दौरान शिक्षक बच्चों को नियमित रूप से पढ़ने और लिखने से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में शामिल करेंगे ताकि पढ़ना विद्यार्थियों के दैनिक जीवन का हिस्सा बन सके।
शिक्षक भी साझा करेंगे अपने अनुभव
शिक्षक छात्रों को बताएंगे कि कौन-सी पुस्तक, कहानी, कविता या लेख ने उनके जीवन और सोच पर सकारात्मक प्रभाव डाला। इसके अलावा तीन से चार शिक्षक अपने पढ़ने के अनुभव बच्चों के साथ साझा करेंगे और विद्यार्थियों के साथ बैठकर स्वयं भी पुस्तकें पढ़ेंगे।
बैठकों में शिक्षक यह भी चर्चा करेंगे कि उनके विद्यालय में पढ़ने से जुड़ी कौन-कौन सी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, उन्हें किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और उनका समाधान कैसे किया गया।
स्क्रीन टाइम कम करने की पहल
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि विद्यालयों में बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के लिए समाचार पत्र पढ़ने और उससे संबंधित गतिविधियों का आयोजन किया जाए। सभी विद्यालयों में समाचार पत्रों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ छात्रों की भाषा क्षमता, शब्दावली और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को भी मजबूत किया जाएगा।
प्रार्थना सभा में होगा समाचार वाचन
नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों की प्रार्थना सभा में नियमित रूप से समाचार वाचन कराया जाएगा। साथ ही प्रमुख लेखों और समसामयिक विषयों पर चर्चा भी आयोजित की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों में सामान्य ज्ञान और अभिव्यक्ति क्षमता का विकास हो सके।
स्कूलों में बनेंगे रीडिंग क्लब
अपर मुख्य सचिव ने विद्यालयों में रीडिंग क्लब गठित करने के भी निर्देश दिए हैं। इन क्लबों के माध्यम से छात्रों को भारतीय समाज, सांस्कृतिक विरासत और साहित्य से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही विद्यालयों में चल रहे बुक अभियान को भी और अधिक गति देने पर जोर दिया गया है.
यह पहल बच्चों में पढ़ने की रुचि बढ़ाने, भाषा कौशल विकसित करने और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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