पिछड़े विद्यार्थियों के लिए ‘कैच-अप’ रणनीति पर होगा शिक्षकों का जोर
जरवलरोड। परिषदीय विद्यालयों में अब केवल नामांकन बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की क्षमता और दैनिक प्रगति पर भी विशेष नजर रखी जाएगी। इसी उद्देश्य से शुक्रवार को जरवल विकासखंड के संकुलों में आयोजित मासिक बैठक में शिक्षकों ने नामांकन, छात्र उपस्थिति, गतिविधि आधारित शिक्षण और सीखने में पिछड़ रहे बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने की रणनीति पर विस्तार से मंथन किया।
खंड शिक्षा अधिकारी अरविंद बहादुर सिंह की अध्यक्षता में न्याय पंचायत तप्पेसिपाह, बैगौरा और जरवल में आयोजित बैठकों में विद्यालयों की शैक्षिक गुणवत्ता, प्रभावी शिक्षण व्यवहार, कैच-अप शिक्षण रणनीति और पठन संस्कृति को मजबूत बनाने पर बिंदुवार समीक्षा की गई। शिक्षकों ने प्रभावी शिक्षण के दस व्यवहारों पर चर्चा की तथा कक्षा शिक्षण के नए मॉडल साझा किए।
एआरपी सनत तिवारी, विनय शुक्ला, अभिषेक श्रीवास्तव, विनय श्रीवास्तव और विनय सिंह ने कहा कि गतिविधि आधारित शिक्षण, नियमित आकलन और सतत अभ्यास से बच्चों की सीखने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।
बीईओ अरविंद बहादुर सिंह ने कहा कि संकुल बैठक का उद्देश्य शिक्षकों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान, नवीन शिक्षण पद्धतियों का प्रसार और शासन की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सीखने में पिछड़ रहे विद्यार्थियों को कैच-अप रणनीति के माध्यम से कक्षा और आयु के अनुरूप दक्ष बनाया जाएगा।
बैठक का संचालन नोडल संकुल सुरेश रोज़ेन ने किया। इसमें बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहीं।
बैठक के प्रमुख बिंदु
गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर।
नामांकन के साथ नियमित उपस्थिति की समीक्षा।
पिछड़े विद्यार्थियों के लिए कैच-अप शिक्षण रणनीति।
पठन संस्कृति मजबूत करने और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर मंथन।

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