यूपी में शिक्षा की नई अलख: योगी सरकार ने शुरू किया 'बालवाटिका नवारंभ उत्सव, खेल-खेल में सीखेंगे नौनिहाल Bal Vatika Navarambh

यूपी में शिक्षा की नई अलख: योगी सरकार ने शुरू किया 'बालवाटिका नवारंभ उत्सव, खेल-खेल में सीखेंगे नौनिहाल

खनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य की प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से 'बालवाटिका नवारंभ उत्सव' का भव्य आयोजन किया है। इस विशेष उत्सव का मुख्य लक्ष्य 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को औपचारिक शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें स्कूल के माहौल के प्रति उत्साहित करना है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इस दूरदर्शी पहल के तहत प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को, विशेषकर 3 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के छात्रों को शिक्षा के साथ जोड़ने का एक व्यापक खाका तैयार किया गया है, ताकि कोई भी बच्चा ज्ञान की रोशनी से वंचित न रहे।

 अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा यह पहल बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

​शीर्ष अधिकारियों ने किया उत्सव का भव्य उद्घाटन
​राजधानी लखनऊ में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक मोनिका रानी ने संयुक्त रूप से किया।

​'नवारंभ उत्सव' का मुख्य उद्देश्य और अगली कक्षा की तैयारी
अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि 'नवारंभ उत्सव' केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से स्कूल से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।

इसका प्राथमिक उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 3 से 6 वर्ष के बच्चे खेल-खेल में बुनियादी चीजें सीखें, ताकि जब वे 6 वर्ष की आयु पूर्ण करें, तो उन्हें कक्षा 1 में प्रवेश लेने और वहाँ के पाठ्यक्रम को समझने में कोई कठिनाई न हो। यह पहल बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर को कम करने में भी मील का पत्थर साबित होगी।

​खेल आधारित शिक्षण और 'रेत पर लेखन' गतिविधि
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, विशेषकर खेल आधारित शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जब बच्चा खेल के जरिए सीखता है, तो उसमें आत्मविश्वास, रचनात्मकता और निर्णय लेने की क्षमता का प्राकृतिक विकास होता है।

उत्सव के दौरान 'रेत पर लेखन' गतिविधि आकर्षण का मुख्य केंद्र रही, जिसमें बच्चों ने अपनी उंगलियों से रेत पर अक्षर उकेरकर अक्षर ज्ञान प्राप्त किया। इस तरह की गतिविधियों से बच्चों में सीखने के प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा होती है और वे बोझिल पढ़ाई के बजाय आनंद के साथ स्कूल आते हैं।

​जनभागीदारी और समुदाय का सक्रिय सहयोग

इस कार्यक्रम की एक बड़ी सफलता इसमें अभिभावकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी रही। सरकार का मानना है कि बाल शिक्षा तभी सफल हो सकती है जब समाज इसमें बराबर का हिस्सेदार बने।

'नवारंभ उत्सव' के माध्यम से अभिभावकों को प्रेरित किया गया कि वे अपने बच्चों का समय पर नामांकन कराएं। स्थानीय स्तर पर बने इस सकारात्मक वातावरण से न केवल 3 से 6 वर्ष के बच्चों के नामांकन में वृद्धि होने की उम्मीद है, बल्कि प्राथमिक विद्यालयों के प्रति जनता का विश्वास भी और अधिक मजबूत हुआ है।

अभिषेक यादव

Post a Comment

أحدث أقدم