यूपी के सरकारी कर्मचारियों की बढ़ी मुश्किलें! योगी सरकार ने बदल दिए 70 साल पुराने नियम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में सरकारी कर्मचारियों की 'आचरण नियमावली, 1956' में बड़े बदलावों को हरी झंडी दे दी गई है।
इन संशोधनों का सीधा असर उत्तर प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों की वित्तीय गतिविधियों और उनकी संपत्तियों के ब्योरे पर पड़ने वाला है। इस बैठक में न केवल कर्मचारियों के लिए नियम कड़े किए गए, बल्कि पीएम आवास योजना 2.0 और कांशीराम आवास योजना को लेकर भी जनहितकारी फैसले लिए गए।
भ्रष्टाचार पर लगाम: दशकों पुराने नियमों में बदलाव
उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति को आगे बढ़ाते हुए सरकार ने दशकों पुरानी आचरण नियमावली के नियम-21 और नियम-24 में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। सरकार का मानना है कि आज के दौर में निवेश के तरीके और साधन पूरी तरह बदल चुके हैं, इसलिए नियमों का आधुनिक होना बेहद जरूरी है। इन बदलावों के बाद अब सरकारी बाबू अपनी कमाई और निवेश को आसानी से छिपा नहीं पाएंगे।
शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड निवेश पर रहेगी पैनी नजर
संशोधित नियम-21 के तहत अब सरकारी कर्मचारियों के निवेश पर सरकार की सीधी नजर रहेगी। यदि कोई कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष के भीतर अपने मूल वेतन (Basic Salary) के छह महीने से ज्यादा की राशि शेयर बाजार, स्टॉक या म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय साधनों में निवेश करता है, तो उसे इसकी लिखित जानकारी अपने विभाग के सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी। पहले यह व्यवस्था इतनी स्पष्ट नहीं थी, लेकिन अब निवेश के बड़े आंकड़ों को छिपाना नामुमकिन होगा।
कार और ज्वेलरी जैसी चल संपत्ति के लिए नई सीमा
सरकार ने नियम-24 में बदलाव कर कर्मचारियों को थोड़ी राहत भी दी है और सीमा को अधिक व्यावहारिक बनाया है। अब यदि कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से ज्यादा कीमत की चल संपत्ति, जैसे कि कार, महंगे इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स या ज्वेलरी खरीदता है, तो उसे इसकी सूचना विभाग को देनी होगी। आपको बता दें कि पहले यह सीमा मात्र एक महीने के वेतन के बराबर थी, जिसे अब बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है।
अचल संपत्ति: अब हर साल देना होगा पूरा हिसाब
जमीन, मकान और फ्लैट जैसी अचल संपत्तियों को लेकर सबसे बड़ा और कड़ा बदलाव देखा गया है। अब तक की व्यवस्था के अनुसार, कर्मचारियों को हर पांच साल में एक बार अपनी अचल संपत्ति का ब्योरा देना होता था। सरकार ने अब इस पांच साल की अवधि को खत्म कर दिया है। अब से हर सरकारी कर्मचारी को हर साल अपनी संपत्तियों का नया हिसाब-किताब सरकार को सौंपना होगा। इस कदम से अवैध तरीके से संपत्ति अर्जित करने वालों पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा।
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