यूपी में वार्ड में स्कूल न होने से आरटीई में सैकड़ों बच्चे नामांकन से वंचित, दो चरणों में 2560 आवेदन निरस्त RTE

यूपी में वार्ड में स्कूल न होने से आरटीई में सैकड़ों बच्चे नामांकन से वंचित, दो चरणों में 2560 आवेदन निरस्त

जागरण संवाददाता, महराजगंज। निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस वर्ष लागू नई व्यवस्था के कारण जिले में सैकड़ों बच्चे निजी विद्यालयों में प्रवेश से वंचित हो रहे हैं।

शासनादेश के अनुसार अब छात्रों को उसी वार्ड में स्थित विद्यालय में आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया है, जहां वे निवास करते हैं। लेकिन जिले के कई वार्डों में निजी विद्यालय न होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चों के आवेदन स्वत: निरस्त हो रहे हैं।


आरटीई के तहत अब तक दो चरणों में नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसमें करीब 3700 से अधिक अभिभावकों ने अपने बच्चों के प्रवेश के लिए आवेदन किया।

पहले चरण में कुल 1949 अभिभावकों ने आवेदन किया था, लेकिन इनमें से मात्र 554 आवेदन ही स्वीकृत हो सके। स्वीकृत आवेदनों में भी 494 बच्चों को ही विद्यालय आवंटित हो पाया, जबकि 60 बच्चों को चयनित होने के बावजूद सीट न मिलने के कारण विद्यालय नहीं मिल सका।

वहीं 1395 आवेदन स्वत: निरस्त हो गए, जिनमें अधिकांश मामलों में संबंधित वार्ड में निजी विद्यालय न होना प्रमुख कारण रहा। इसी प्रकार दूसरे चरण में 1755 अभिभावकों ने आवेदन किया। इनमें से 630 आवेदन स्वीकृत हुए, लेकिन इनमें भी केवल 528 बच्चों को ही विद्यालय आवंटित किया जा सका।

शेष 102 बच्चों को चयन के बाद भी विद्यालय नहीं मिल पाया। वहीं 1125 आवेदन विभिन्न कारणों से निरस्त कर दिए गए, जिनमें वार्ड में विद्यालय न होना प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

इस प्रकार दोनों चरणों को मिलाकर अब तक 3704 आवेदन आए, जिनमें से करीब 2520 आवेदन वार्ड में विद्यालय न होने समेत अन्य कारणों से निरस्त हो गए। वहीं 162 बच्चों को चयनित होने के बाद भी सीट उपलब्ध न होने के कारण विद्यालय आवंटित नहीं हो सका। बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त होने से अभिभावकों में नाराजगी है।

उनका कहना है कि कई वार्डों में निजी विद्यालय नहीं हैं, जिससे उनके बच्चों को आरटीई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अभिभावकों ने मामले की जांच कराते हुए नियमों में सुधार की मांग की है, ताकि अधिक से अधिक बच्चों को योजना का लाभ मिल सके।

आरटीई के तहत आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है, और शासनादेश के अनुसार ही कार्रवाई की जा रही है, हालांकि इस बार यह नया नियम लागू हुआ है, तो शासनादेश का अनुपालन कराते हुए उसी वार्ड में नामांकन कराया जा रहा है, जहां के वह निवासी हैं। योजना के तहत तीसरे चरण के लिए 12 मार्च से पुनः आवेदन प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -रिद्धी पांडेय, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

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