New vs Old Tax Regime: आपके लिए कौन सा बेहतर है? बजट के बाद ऐसे करें अपनी टैक्स प्लानिंग
नई दिल्ली. केंद्रीय बजट 2026-27 पेश होने के बाद टैक्स पेयर्स के लिए अपनी वित्तीय प्लानिंग को अपडेट करने का समय है. हम बता रहे हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश बजट में इनकम टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जाता है, तो आपको अपने भविष्य की प्लानिंग कैसे करनी है.
वर्तमान में नया टैक्स रिजीम डिफॉल्ट है, लेकिन पुराना रिजीम चुनने का विकल्प अब भी उपलब्ध है. अगर आप सैलरीड क्लास से हैं या बिजनेस करते हैं, तो दोनों रिजीम की तुलना करके देखें कि आपके लिए कौन-सा बेहतर है. यहां हम स्लैब की तुलना, डिडक्शन, 80C के फायदे और निवेश विकल्पों पर विस्तार से चर्चा कर रहे हैं. ध्यान दें कि ये नियम FY 2025-26 (AY 2026-27) के लिए लागू हैं, और बजट 2026 में कोई बदलाव नहीं होने से ये ही जारी रहेंगे. यदि बड़ा बदलाव होता है तो स्थितियां बदल सकती हैं और हम नए बदलावों के बीच आपकी प्लानिंग को लेकर एक खबर जरूर देंगे. तो चलिए समझते हैं.
दोनों टैक्स स्लैब की तुलना: नया vs पुराना
नए टैक्स रिजीम में स्लैब को ज्यादा रिलैक्स्ड बनाया गया है, जहां बेसिक एग्जंप्शन लिमिट 4 लाख रुपये तक है. वहीं, पुराने रिजीम में यह 2.5 लाख रुपये है (60 साल से कम उम्र के लिए). नए रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये है, जबकि पुराने में 50,000 रुपये. सेक्शन 87A के तहत रिबेट नए में 60,000 रुपये (12 लाख तक की इनकम पर) और पुराने में 12,500 रुपये (5 लाख तक) है. इससे नए रिजीम में 12 लाख तक की इनकम प्रभावी रूप से टैक्स-फ्री हो जाती है.
नीचे दी गई टेबल में दोनों रिजीम की स्लैब दरों की तुलना है (व्यक्तिगत टैक्सपेयर्स के लिए, 60 साल से कम उम्र वाले):
| आय की सीमा (रुपये में) | नया टैक्स रिजीम (दर %) | पुराना टैक्स रिजीम (दर %) |
| 0 - 2.5 लाख | 0 | 0 |
| 2.5 - 4 लाख | 0 | 5 |
| 4 - 5 लाख | 5 | 5 |
| 5 - 8 लाख | 5 | 20 |
| 8 - 10 लाख | 10 | 20 |
| 10 - 12 लाख | 10 | 30 |
| 12 - 16 लाख | 15 | 30 |
| 16 - 20 लाख | 20 | 30 |
| 20 - 24 लाख | 25 | 30 |
| 24 लाख से ऊपर | 30 | 30 |
नोट: ऊपर की दरों पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस लगता है. सरचार्ज: 50 लाख से 1 करोड़ तक 5%, 1-2 करोड़ तक 15%, 2-5 करोड़ तक 25% (नए में अधिकतम 25%, पुराने में 37% तक). सीनियर सिटिजन्स के लिए पुराने रिजीम में एग्जंप्शन ज्यादा है (60-80 साल: 3 लाख, 80+ साल: 5 लाख).
छूट (Deductions) और एग्जंप्शन: क्या अंतर है?
पुराना टैक्स रिजीम डिडक्शन पर आधारित है, जहां आप अपनी इनकम से विभिन्न खर्चों और निवेशों को घटाकर टैक्स कम कर सकते हैं. नए रिजीम में ज्यादातर डिडक्शन उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन यह सिंपल है और कम दरों के कारण लो-मीडियम इनकम वालों के लिए फायदेमंद साबित होता है.
पुराना रिजीम: 70 से ज्यादा डिडक्शन उपलब्ध, जैसे HRA (हाउस रेंट अलाउंस), LTA (लीव ट्रैवल अलाउंस), होम लोन इंटरेस्ट (सेक्शन 24b), एजुकेशन लोन इंटरेस्ट (80E), डोनेशन (80G), सेविंग्स इंटरेस्ट (80TTA). स्टैंडर्ड डिडक्शन 50,000 रुपये. इससे हाई इनकम वाले ज्यादा बचत कर सकते हैं.
नया रिजीम: सीमित डिडक्शन - स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 रुपये (सैलरी पर), एम्प्लॉयर NPS कंट्रीब्यूशन (80CCD(2), 14% तक), कुछ पर्क्स जैसे ट्रांसपोर्ट अलाउंस, मोबाइल रीइंबर्समेंट. HRA, 80C, 80D, होम लोन इंटरेस्ट (सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी पर नहीं) उपलब्ध नहीं.
बजट के बाद, अगर आपके डिडक्शन 3.75 लाख से ज्यादा हैं (स्टैंडर्ड डिडक्शन + अन्य), तो पुराना रिजीम बेहतर रहेगा. अन्यथा, आपको नए की तरफ जाना चाहिए.
80C का फायदा: पुराने रिजीम में कैसे बचाएं टैक्स?
सेक्शन 80C पुराने रिजीम का सबसे बड़ा फायदा है, जहां आप 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं. इससे आपकी टैक्सेबल इनकम कम होती है और टैक्स बचत होती है. नए रिजीम में 80C उपलब्ध नहीं है, इसलिए अगर आप निवेश करते हैं, तो पुराना चुनें.
फायदे: 1.5 लाख तक डिडक्शन से 5% स्लैब में 7,500 रुपये, 20% में 30,000 रुपये और 30% में 45,000 रुपये तक की बचत हो सकती है. इसके अलावा, 80CCD(1B) से NPS में अतिरिक्त 50,000 रुपये डिडक्शन मिलेगा.
उदाहरण के लिए, अगर आपकी इनकम 10 लाख है और 1.5 लाख 80C निवेश है, तो पुराने में टैक्सेबल इनकम 8 लाख हो जाती है, जिससे टैक्स कम होता है. नए में पूरा 10 लाख रुपया टैक्सेबल हो जाता है.
बजट के बाद, 80C को अपनी प्लानिंग में शामिल करें अगर आप पुराना रिजीम चुनते हैं.
निवेश के विकल्प: 80C के तहत क्या चुनें?
80C के तहत निवेश न केवल टैक्स बचाते हैं बल्कि वेल्थ क्रिएशन भी करते हैं. यहां कुछ पॉपुलर ऑप्शन दिए गए हैं-
- PPF (पब्लिक प्रॉविडेंट फंड): 7.1% ब्याज, 15 साल लॉक-इन, टैक्स-फ्री रिटर्न.
- ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम): म्यूचुअल फंड, 3 साल लॉक-इन, मार्केट-लिंक्ड रिटर्न (10-15% औसतन).
- NSC (नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट): 7.7% ब्याज, 5 साल लॉक-इन.
- टैक्स सेविंग FD: 5 साल लॉक-इन, 6-7% ब्याज.
- NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम): रिटायरमेंट के लिए, इक्विटी/डेब्ट मिक्स, अतिरिक्त 50,000 डिडक्शन.
- लाइफ इंश्योरेंस प्रीमियम: टर्म या ULIP प्लान.
- होम लोन प्रिंसिपल रीपेमेंट: अगर लोन है तो.
- बजट के बाद, अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार चुनें. अगर नए रिजीम में हैं, तो भी ये निवेश फायदेमंद हैं लेकिन टैक्स बेनिफिट नहीं मिलेगा.
आपके लिए कौन सा बेहतर? टैक्स प्लानिंग टिप्स
- कम इनकम (12 लाख तक): नया रिजीम बेहतर होगा, क्योंकि रिबेट से जीरो टैक्स.
- मीडियम इनकम (12-20 लाख): अगर डिडक्शन कम हैं (1.5 लाख से कम) तो नया चुनें, अगर ज्यादा हैं तो पुराना.
- हाई इनकम (20 लाख+): पुराना, क्योंकि डिडक्शन से ज्यादा बचत की जा सकती है.
- प्लानिंग टिप्स: अगर पुराना चुनना है तो ITR फाइलिंग से पहले ऑप्ट-आउट फॉर्म भरें. इसके लिए आप incometaxindia.gov.in पर उपलब्ध कैलकुलेटर का यूज कर सकते हैं. बजट के बाद, अगर कोई बदलाव आया तो अपडेट करें. निवेश साल की शुरुआत में करें, कंपाउंडिंग का फायदा लें.
कुल मिलाकर, बजट 2026 में टैक्स स्लैब स्थिर रहने से आपकी प्लानिंग आसान हो गई है. अपनी सिचुएशन के अनुसार चुनें और टैक्स कंसल्टेंट से सलाह जरूर लें.
إرسال تعليق