लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों के लिए बड़ी राहत की खबर आई है। प्रदेश की उत्तर प्रदेश सरकार ने दोनों वर्गों के मानदेय में 8,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की घोषणा की है। इस फैसले से लगभग 1.68 लाख कर्मियों और उनके परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।
सरकार के इस निर्णय से राज्य के खजाने पर करीब 1480 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक वित्तीय भार पड़ेगा, जिसे राज्य और केंद्र सरकार मिलकर वहन करेंगी।
कितनी बढ़ी सैलरी? समझिए पूरा गणित
सरकार ने शिक्षामित्रों और अनुदेशकों दोनों के मानदेय में समान रूप से 8,000 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की है। 11 माह के कार्यकाल के आधार पर प्रत्येक कर्मी को सालाना 88,000 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे।
| पद नाम | वर्तमान मानदेय | नया मानदेय | कुल लाभार्थी | वार्षिक अतिरिक्त व्यय (अनुमानित) |
|---|---|---|---|---|
| शिक्षामित्र | ₹10,000 | ₹18,000 | 43,450 | ₹1,262.36 करोड़ |
| अंशकालिक अनुदेशक | ₹9,000 | ₹17,000 | 24,781 | ₹218.07 करोड़ |
प्रदेश में वर्तमान में 43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। अब तक उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह (11 माह) मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया गया है।
इस फैसले से सरकार पर शिक्षामित्रों के लिए करीब 1,262.36 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय आएगा।
अंशकालिक अनुदेशकों को भी बड़ी राहत
प्रदेश में 24,781 अंशकालिक अनुदेशक कार्यरत हैं। उनका मानदेय 9,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
इस वर्ग पर सरकार का अतिरिक्त वार्षिक खर्च लगभग 218.07 करोड़ रुपये होगा।
शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा मजबूती
लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इन कर्मियों के लिए यह निर्णय किसी बड़ी राहत से कम नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक स्थिरता मिलने से शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मनोबल बढ़ेगा, जिससे प्राथमिक और बेसिक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है।
सरकार के इस फैसले को सामाजिक सुरक्षा और कर्मचारी कल्याण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि बढ़ा हुआ मानदेय कब से लागू किया जाएगा और इसका लाभ कर्मियों को कितनी जल्दी मिलना शुरू होगा।

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