लखनऊ: उत्तर प्रदेश में छात्रों को एकीकृत डिजिटल शैक्षणिक पहचान देने की महत्वाकांक्षी पहल ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रही है। राज्य में ‘APAAR ID’ (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) के तहत अब तक 37.41 प्रतिशत छात्रों की आईडी नहीं बन पाई है। शासन ने इस धीमी प्रगति पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिलों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षा विभाग के सामने 4.24 करोड़ छात्रों को डिजिटल आईडी से जोड़ने का लक्ष्य है। हालांकि अब तक केवल 2.65 करोड़ छात्रों की आईडी ही बन सकी है, जबकि 1.58 करोड़ छात्र अभी भी इस डिजिटल व्यवस्था से बाहर हैं।
| विवरण | संख्या / प्रतिशत |
|---|---|
| कुल लक्ष्य (छात्र) | 4.24 करोड़ |
| बनी हुई आईडी | 2.65 करोड़ |
| लंबित आईडी | 1.58 करोड़ |
| शेष कार्य | 37.41% |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि योजना की रफ्तार में अपेक्षित तेजी नहीं आई है, जबकि इसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुगमता लाने के लिए अहम माना जा रहा है।
शासन की सख्ती, जिलों को चेतावनी
अपर मुख्य सचिव (बेसिक व माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने समीक्षा बैठक में देरी पर नाराजगी जताई है। विभाग का मानना है कि कई जिलों में इस योजना को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, जिससे प्रगति प्रभावित हो रही है। अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि स्कूल स्तर पर डेटा सत्यापन और पंजीकरण की प्रक्रिया को युद्धस्तर पर पूरा किया जाए।
क्यों अहम है यह आईडी?
यह 12 अंकों की आईडी केवल एक नंबर नहीं, बल्कि छात्र के पूरे शैक्षणिक जीवन का डिजिटल रिकॉर्ड है। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
- यूनिक पहचान: प्रत्येक छात्र को एक विशिष्ट 12 अंकों की आईडी मिलेगी।
- ड्रॉपआउट ट्रैकिंग: पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले छात्रों की पहचान कर उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ा जा सकेगा।
- डिजिटल रिकॉर्ड: मार्कशीट, प्रमाणपत्र और उपलब्धियां एक ही प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रहेंगी।
- आसान ट्रांसफर: स्कूल बदलने पर रिकॉर्ड ट्रांसफर की जटिलता समाप्त होगी।
- प्रत्यक्ष लाभ: छात्रवृत्ति और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से मिल सकेगा।
आगे की राह
शिक्षा विभाग का स्पष्ट लक्ष्य है कि शेष 1.58 करोड़ छात्रों को जल्द से जल्द इस डिजिटल ढांचे से जोड़ा जाए। इसके लिए जिलों में विशेष अभियान चलाने और नियमित मॉनिटरिंग की तैयारी की जा रही है।
यदि निर्धारित समयसीमा में लक्ष्य हासिल नहीं हुआ तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल रूप देने की इस पहल की सफलता अब जिलों की सक्रियता और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर निर्भर करेगी।

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