यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई UP BOARD

यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई

माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

किताबें छापकर खुले बाजार में बेचने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने इसी मामले में मेसर्स मित्तल बुक डिपो केस के फैसले को लागू करते हुए याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी तथा न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मेसर्स राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व दो अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका में परिषद के सचिव की आठ जनवरी 2026 की विज्ञप्ति व 31 जनवरी 2026 के संशोधन को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के लोगो-नाम का उपयोग वर्जित
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी यूपी बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के नाम व लोगो के उपयोग का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सिर्फ इतना भर कहा है कि बोर्ड किसी को किताब छापने से नहीं रोक सकता (यदि यह कानून न तोड़े), लेकिन स्कूल में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना बोर्ड का काम है। किसी भी अनधिकृत प्रकाशक को एनसीईआरटी या यूपी बोर्ड के नाम/लोगो का उपयोग कर पुस्तकें छापने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना कापीराइट अधिनियम और यूपी एक्ट संख्या सात (1979) का उल्लंघन है।

 सचिव के अनुसार, यह तथ्य भ्रामक है कि निर्धारित पुस्तकों तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए केवल तीन मुद्रकों मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा, मेसर्स पीतम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड बिजौली झांसी और मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को ही अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी भी निजी प्रकाशक की पुस्तक 'पाठ्यपुस्तक' के रूप में अधिकृत नहीं है।

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