लखनऊ: उत्तर प्रदेश में बुनियादी शिक्षा के स्तर को सुधारने और 'निपुण भारत' लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से प्राप्त करने के लिए महानिदेशक, स्कूल शिक्षा द्वारा नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। फरवरी 2026 की अद्यतन रिपोर्ट की समीक्षा के बाद यह पाया गया कि निपुण+ ऐप पर उपलब्ध 'प्रैक्टिस टेस्ट' (Practice Test) के माध्यम से बच्चों का अभ्यास वर्तमान में अपेक्षित स्तर से काफी कम है।
इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने समस्त BSA, BEO, DIET मेंटर और SRG/ARP को बच्चों की दक्षताओं में सुधार लाने हेतु विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
प्रमुख निर्देश और कार्ययोजना
प्रशासन द्वारा जारी आदेश में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष बल दिया गया है:
- अनिवार्य नियमित अभ्यास: कक्षा 1 और 2 के प्रत्येक बच्चे को निपुण+ ऐप पर नियमित रूप से प्रैक्टिस टेस्ट कराना अब अनिवार्य होगा।
- डेटा आधारित सुधार: टेस्ट से प्राप्त परिणामों का विश्लेषण किया जाएगा। जिन दक्षताओं (Competencies) में बच्चे कमजोर पाए जाएंगे, शिक्षकों को उन पर केंद्रित विशेष उपचारात्मक कक्षाएं संचालित करनी होंगी।
- शून्य अंतराल नीति: यह सुनिश्चित किया जाना है कि कोई भी बच्चा इस मूल्यांकन प्रक्रिया से छूटे नहीं, ताकि उनकी वास्तविक सीखने की स्थिति का सटीक आकलन हो सके।
- पर्यवेक्षण में जवाबदेही: अब से विद्यालयों के निरीक्षण और सहयोगात्मक पर्यवेक्षण के दौरान अधिकारी निपुण+ ऐप के उपयोग की प्रगति की समीक्षा अनिवार्य रूप से करेंगे।
जनपदवार प्रगति पर पैनी नजर
महानिदेशक कार्यालय द्वारा जारी जनपदवार प्रगति ट्रैकर के माध्यम से उन जिलों की पहचान की जा रही है जहाँ प्रदर्शन कम है। कम प्रगति वाले जनपदों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षकों के साथ समन्वय स्थापित कर ऐप के उपयोग में तेजी लाएं।
महत्वपूर्ण: निपुण+ ऐप केवल एक डिजिटल टूल नहीं है, बल्कि यह बच्चों की सीखने की कमियों को पहचानने और उन्हें दूर करने का एक सशक्त माध्यम है।



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