UP में 2011 में हुई शिक्षक भर्ती में आया बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट से आने वाला है बड़ा फैसला Teachers Vacancy court matter

UP में 2011 में हुई शिक्षक भर्ती में आया बड़ा मोड़, सुप्रीम कोर्ट से आने वाला है बड़ा फैसला

उत्तर प्रदेश में साल 2011 में परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती के लिए एक विज्ञापन जारी किया गया….30 नवंबर 2011 को विज्ञापन जारी होने के बाद में आगे की प्रक्रिया शुरु हुई….साल 2011 में आए इस शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए 72825 पदों पर भर्ती होनी थी….लाखों बच्चों ने फॉर्म भरे और परीक्षाएं दी….फिर इस परीक्षा की कटऑफ लिस्ट आ गई…फिर मामला यहीं से उलझ गया….क्योकिं इस मामले में जो कटऑफ रखा गया था उससे ज्यादा बच्चों के नंबर आया…मामला कोर्ट तक पहुंच गया….और 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले ने 66655 नियुक्तियों को सुरक्षित किया था…हालांकि उसके बावजूद कटऑफ से अधिक पाने वाले तमाम अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गए थे।


बाद में इन्हीं अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिकाएं की थी जिसकी सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने ऐसे अभ्यर्थियों की सूची बनाने के निर्देश दिए थे।

जो अभ्यर्थी याचिका करने से वंचित रह गए थे उन्हें 16 दिसंबर तक तक नाम जुड़वाने का मौका मिला था… 25 जुलाई 2017 से पूर्व याचिकाकर्ता रहे और वर्तमान में अवमानना याचिका में भी शामिल याचिकाकर्ताओं की संख्या लगभग एक हजार थी….पर तभी बहुत सारे अभ्यर्थियों के नाम इसमें नहीं जुड़ पाए…फिर कोर्ट ने थोड़ा सा और समय दिया…जिसके बाद में सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद एक सप्ताह के अंदर लगभग 14 हजार अभ्यर्थियों ने याचिकाओं में अपना नाम जुड़वाया है। कुछ अभ्यर्थियों के नाम दो-तीन बार भी मान लिए तब भी दस हजार से अधिक अभ्यर्थी ऐसे हैं जो कटऑफ से अधिक अंक पाने के बावजूद नियुक्ति से वंचित हैं….

बता दें कि शीर्ष कोर्ट ने नोडल अधिवक्ताओं को अब नया डेटा स्वीकार नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत में अगली सुनवाई 22 जनवरी 2026 को दोपहर दो बजे होगी। इस केस से जुड़े जानकारों की मानें तो यूपी में जुलाई 2011 में आरटीई एक्ट लागू होने के बाद आई पहली भर्ती में बेरोजगार रह गए आवेदकों के लिए उम्मीद की किरण दिख रही है। खैर क्योंकि इस मामले में 22 तारीख को सुनवाई होनी है…तो इतने हजार बच्चों को उम्मीद है कि इस बार सुनवाई में उनके पक्ष में फैसला आ सकता है….साल 2017 लेकर अब तक कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों के लिए एक मौका है….शायद इस वक्त के बेरोजगार अभ्यर्थियों को अब नौकरी मिल सकती है….

इसके अलावा बता दें कि 7 दिसंबर 2015, इस तारीख को सुप्रीम कोर्ट में जो याचिकाएं थी…उनको नियुक्ति देने का फैसला किया था…जिसमें वकीलों से कहा गया था कि वो नाम दें….इस फैसले के कारण 862 लोगों को नौकरी दे दी गई थी…जो कि कम कटऑफ के थे और योग्य भी नहीं थे…जिसकी वजह से मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया…

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नोडल अधिकारी बनाए गए एडवोकेट प्रशांत शुक्ला ने भारत समाचार को जानकारी देते हुए बताया कि 2011 की इस भर्ती के मामले में अब तक कुछ 32 हजार आवेदन आए हैं…जिन्होंने अपने डिटेल शेयर करते हुए बताया है कि उनके नंबर उस समय तय की गई कटऑफ लिस्ट से ज्यादा आए है….लेकिन बेरोजगार रह गए आवेदकों की लिस्ट को ध्यान से देखा जाए तो कुछ नाम उसमें 2 से 3 बार हैं..इसलिए अगर उन नामों को हटा भी दिया जाए तो करीब 18 हजार आवेदन नोडल अधिकारी के पास अभी भी है….साथ ही उन्होंने आगे ये भी जानकारी कि 72825 पदों में से 6 हजार 170 पद अभी भी खाली है…जिनपर नियुक्ति होनी है….

ऐसे में 10 हजार से ज्यादा अभ्यर्थियों को अभी भी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद में उनको नियु्क्ति मिल सकती है…और सुप्रीम कोर्ट उनकी नौकरी के सपने को पूरा कर सकता है…

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