सरकारी कर्मचारियों के लिए स्पाउस ट्रांसफर पर राज्यसभा में दिया गया लिखित जवाब
नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों के पति–पत्नी (Spousal Transfer) से जुड़े मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने राज्यसभा में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। यह जानकारी राज्यसभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 2198 के उत्तर में दी गई, जिसका जवाब 18 दिसंबर 2025 को कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत किया गया।
राज्यसभा में क्या पूछा गया था?
राज्यसभा सांसद प्रो. मनोज कुमार झा ने सरकार से पूछा था कि—
- क्या कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) एक ही मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों को पति–पत्नी आधार पर स्थानांतरण की अनुमति देता है?
- यदि हां, तो इससे संबंधित नीति का विवरण और वर्षवार मामलों की संख्या क्या है?
- यदि नहीं, तो इसके क्या कारण हैं और सरकार इस दिशा में क्या कदम उठा रही है?
सरकार का स्पष्ट जवाब क्या रहा?
इस प्रश्न का लिखित उत्तर राज्यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह (कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय एवं प्रधानमंत्री कार्यालय) द्वारा दिया गया।
सरकार ने जवाब में कहा कि—
👉 केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों को पति–पत्नी को एक ही स्थान पर तैनात करने से संबंधित दिशा-निर्देश (Guidelines) जारी किए हुए हैं।
👉 ये दिशा-निर्देश केंद्रीय/राज्य सरकार सेवाओं और सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में कार्यरत पति–पत्नी पर लागू होते हैं।
स्पाउस ट्रांसफर पर केंद्र सरकार की नीति
सरकार के अनुसार:
- पति और पत्नी यदि सरकारी सेवा में हैं, तो
👉 उन्हें एक ही स्टेशन पर तैनात करने का प्रयास किया जाता है - यह निर्णय संबंधित मंत्रालय/विभाग के प्रशासनिक स्तर पर लिया जाता है
- स्थानांतरण कोई स्वचालित अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक विवेक और उपलब्ध पदों पर निर्भर करता है
ट्रांसफर मामलों का डेटा क्यों उपलब्ध नहीं?
सरकार ने स्पष्ट किया कि—
- पति–पत्नी स्थानांतरण से जुड़े मामलों का
👉 कोई केंद्रीयकृत (Centralized) रिकॉर्ड नहीं रखा जाता - क्योंकि यह प्रक्रिया
👉 संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा स्वयं प्रशासित की जाती है
कर्मचारियों के लिए क्या मायने रखता है यह जवाब?
- स्पाउस ट्रांसफर के लिए DoPT की गाइडलाइंस मौजूद हैं
- कर्मचारी अपने विभाग में इन नियमों के आधार पर आवेदन कर सकते हैं
- यदि विभागीय स्तर पर आवेदन अस्वीकार होता है, तो
👉 कर्मचारी नियमों के उल्लंघन के आधार पर प्रतिनिधित्व या न्यायिक उपाय अपना सकते हैं
निष्कर्ष
राज्यसभा में सरकार के इस उत्तर से यह स्पष्ट हो गया है कि स्पाउस ट्रांसफर कोई नई मांग नहीं, बल्कि पहले से मान्य नीति का हिस्सा है। हालांकि, इसका क्रियान्वयन पूरी तरह संबंधित विभागों पर निर्भर करता है और हर मामले में अलग-अलग प्रशासनिक परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाता है।

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