शाहजहांपुर। बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों से मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति का विवरण दर्ज कराने को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्तमान में राज्य कर्मचारी की श्रेणी में शामिल नहीं हैं, इसके बावजूद उन्हें राज्य कर्मचारियों की तरह मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, जिससे असंतोष और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है।
वित्त एवं लेखाधिकारी के आदेश पर उठे सवाल
शिक्षकों के अनुसार वित्त एवं लेखाधिकारी, शाहजहांपुर द्वारा मानव संपदा पोर्टल पर चल-अचल संपत्ति विवरण दर्ज कराने के आदेश जारी किए गए हैं। शिक्षक संगठनों का तर्क है कि जब बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यापकों को विधिवत राज्य कर्मचारी का दर्जा ही प्राप्त नहीं है, तो उन पर राज्य कर्मचारियों से जुड़े नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है।
पहले राज्य कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
शिक्षकों का कहना है कि यदि शासन बेसिक शिक्षा परिषद के अध्यापकों को राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रदान करता है, तो उसके बाद संपत्ति विवरण दर्ज कराने में उन्हें किसी प्रकार की आपत्ति नहीं होगी। इसी मांग को लेकर शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की अपील की है।
शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी
शिक्षक संगठनों का आरोप है कि स्पष्ट नीति और कानूनी स्थिति के अभाव में ऐसे आदेश शिक्षकों पर मानसिक दबाव डाल रहे हैं। उनका कहना है कि कभी परिषद कर्मचारी बताकर राज्य कर्मचारी जैसी जिम्मेदारियां थोप दी जाती हैं, तो कभी सुविधाओं के समय उन्हें परिषद कर्मचारी कहकर अलग कर दिया जाता है।
स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने की मांग
शिक्षकों ने शासन से मांग की है कि इस विषय में शीघ्र स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे यह साफ हो सके कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षक मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण देने के लिए बाध्य हैं या नहीं। इससे न केवल अनावश्यक विवाद समाप्त होगा, बल्कि शिक्षकों में व्याप्त असमंजस की स्थिति भी दूर हो सकेगी।
फिलहाल इस मुद्दे पर शिक्षक संगठनों की नजर शासन के अगले कदम पर टिकी हुई है।




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