अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस मामले में सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित पटेल और धनंजय गुप्ता ने बताया कि यह मामला लगातार अदालतों में विचाराधीन रहा है।
बताया गया कि इस प्रकरण की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में हुई थी, जिसके बाद लगातार तारीखें मिलती रहीं। अब अगली सुनवाई 4 फरवरी को निर्धारित है। इसी को देखते हुए अभ्यर्थियों ने दो फरवरी से शांतिपूर्ण आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है।
नेतृत्वकर्ताओं ने कहा कि सभी अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके तथा उनके परिजनों की सूची तैयार की जा रही है। आंदोलन को संगठित और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जाएगा।
अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि 31 जनवरी को लोक सेवा आयोग द्वारा इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है। अभ्यर्थियों के अनुसार, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच के फैसले के बावजूद उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला है।
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनके साथ हो रहे कथित अन्याय का समाधान नहीं होता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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