UGC-NAAC: डेढ़ साल से बंद है NAAC मूल्यांकन पोर्टल; राज्यों की सख्ती से उच्च शिक्षण संस्थानों पर बढ़ा दबाव

UGC-NAAC: डेढ़ साल से बंद है NAAC मूल्यांकन पोर्टल; राज्यों की सख्ती से उच्च शिक्षण संस्थानों पर बढ़ा दबाव

UGC-NAAC Evaluation Portal: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का नैक मूल्यांकन पोर्टल पिछले डेढ़ वर्ष से बंद रहने के कारण देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की ग्रेडिंग प्रक्रिया पूरी तरह ठप हो गई है।


उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए यह स्थिति गंभीर चुनौती बन गई है, क्योंकि नई मान्यता प्राप्त करने के साथ-साथ दूसरे चक्र के मूल्यांकन के लिए आवेदन करने वाले कई विश्वविद्यालय और कॉलेज लंबे समय से प्रतीक्षा में हैं।

राज्यों की बढ़ी सख्ती

यूजीसी के पोर्टल के नहीं खुलने से संस्थान औपचारिक रूप से ऑनलाइन आवेदन जमा ही नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर सीधे उन कॉलेजों पर पड़ रहा है, जिन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर नैक ग्रेडिंग पूरी करने का निर्देश दिया गया था। इसी दौरान, राज्य सरकारों ने भी नैक रहित कॉलेजों पर सख्ती शुरू कर दी है। कई राज्यों, विशेषकर बिहार में बिना नैक ग्रेडिंग वाले संस्थानों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना और अन्य आकादमिक लाभ देने से रोकने के निर्देश जारी किए गए हैं। इससे कॉलेज प्रबंधन पर नैक मूल्यांकन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का दबाव और बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार यूजीसी की ओर से गठित पिछली नैक टीम पर अनियमितताओं और प्रक्रियागत आरोप लगे थे। इसी विवाद के बाद नैक पोर्टल को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया। इसके बाद से नई मूल्यांकन प्रणाली पर काम चल रहा है, ताकि प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुदृढ़ और संस्थानों की वास्तविक गुणवत्ता के अनुरूप हो सके। हालांकि, इतने लंबे समय तक पोर्टल बंद रहने से उच्च शिक्षा क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल है।

संस्थानों की गुहार

कई विश्वविद्यालयों-विशेषकर वे जो बेहतर ग्रेडिंग के लिए प्रतिस्पर्धा में हैं, यूजीसी से अनुरोध किया है कि पोर्टल शीघ्र खोला जाए। ताकि वे अपने दस्तावेज, अकादमिक विवरण, शोध कार्य, आधारभूत संरचना के प्रमाण और अन्य आवश्यक रिपोर्ट अपलोड कर सकें। वहीं, पहले से मान्यता प्राप्त संस्थान भी दूसरे चक्र और आगामी चक्रों में ग्रेडिंग सुधार के लिए आवेदन करना चाहते हैं, परंतु प्रक्रिया ठप होने से वे भी प्रभावित हैं।

नैक के मॉडल में किए जा रहे बदलाव

नैक मूल्यांकन के विशेषज्ञ सह कॉलेज ऑफ कॉमर्स के आईक्यूएससी के संयोजक प्रो. संतोष कुमार बताते हैं कि नैक के मॉडल में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। डॉ. राधाकृष्णण समिति के रिपोर्ट के आधार पर नैक मूलयांकन के मानकों में गुणात्मक और परिमाणात्मक बदलाव करते हुए नैक एक्रेडिटेशन के लिए नए मैनुअल का प्रकाशन पिछले डेढ़ वर्षों से प्रतिक्षित है। हालांकि स्टेट होल्डर्स से विमर्श के पश्चात नैक ने बाइनरी एक्रडिटेशन और मैच्यूरिटी बेस्ड ग्रेड लेने के आधार पर एसेसमेंट एवं एक्रेडिटेशन के लिए मानक को लगभग तय कर लिया है। फिर भी पिछले डेढ़ वर्षों से आवेदन का पोर्टल नहीं खुल रहा है।

नई प्रणाली में डिजिटल सत्यापन, डेटा-ड्रिवन मूल्यांकन और थर्ड-पार्टी पारदर्शिता की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, मूल्यांकन टीमों की चयन प्रक्रिया को और कड़ा बनाया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता या विवाद की पुनरावृत्ति न हो।

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