NPS New Rules: 5 साल का लॉक-इन खत्‍म, निकाल सकेंगे 80% रकम, PFRDA ने दी बड़ी राहत

NPS New Rules: 5 साल का लॉक-इन खत्‍म, निकाल सकेंगे 80% रकम, PFRDA ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली. पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं. 16 दिसंबर को को नोटिफाई किए गए PFRDA (एक्जिट्स एंड विदड्रॉल्स अंडर द नेशनल पेंशन सिस्टम) अमेंडमेंट रेगुलेशंस 2025 ने एनपीएस को प्राइवेट सेक्टर और आम नागरिकों के लिए बेहद लचीला बना दिया है.

गैर-सरकारी सब्‍सक्राइबर्स के लिए 5 साल की लॉक-इन अवधि को हटा दिया गया है. एकमुश्‍त निकासी की राशि को बढा दिया गया है और एनपीएस में निवेश बनाए रखने की सीमा में भी वृद्धि कर दी गई है.


अब तक एनपीएस में निवेश करने वालों के लिए सबसे बड़ी बाधा 'लॉक-इन पीरियड' थी. पुराने नियमों के तहत, गैर-सरकारी क्षेत्र के सब्सक्राइबर्स के लिए 5 साल का लॉक-इन अनिवार्य था. यानी खाता खोलने के 5 साल तक आप इसमें से बाहर नहीं निकल सकते थे. सरकारी कर्मचारियों के लिए 5 साल का लॉक-इन अभी भी लागू रहेगा. यह बदलाव उन लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है जो लंबी अवधि के लिए पैसा फंसने के डर से एनपीएस में पैसा लगाने से कतराते थे.

हाथ में आएगा ज्यादा कैश

NPS से बाहर निकलते समय (Exit Rules) सबसे बड़ा बदलाव पैसे की निकासी के अनुपात में किया गया है. इसे तकनीकी भाषा में एग्जिट रेश्यो कहते हैं. पहले जब कोई सब्सक्राइबर रिटायर होता था या स्कीम से बाहर निकलता था, तो उसे अपने कुल जमा फंड (Corpus) का कम से कम 40% हिस्सा एन्युटी (Annuity) खरीदने में लगाना होता था. एन्युटी वह रकम है जिससे हर महीने पेंशन मिलती है. सब्सक्राइबर केवल 60% पैसा ही एकमुश्त (Lump sum) निकाल सकता था.

संशोधित नियमों के अनुसार, यदि किसी सब्सक्राइबर का कुल कॉर्पस 12 लाख रुपये से अधिक है तो अब 80:20 का नियम लागू होगा. कुल फंड का 80% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं. केवल 20% राशि से एन्युटी (पेंशन प्लान) खरीदना होगा. इससे रिटायर होने वाले लोगों के हाथ में ज्यादा नकदी आएगी. वे इस पैसे का उपयोग घर बनाने, बच्चों की शादी, कर्ज चुकाने या किसी अन्य निवेश में कर सकेंगे, बजाय इसके कि उनका बड़ा हिस्सा पेंशन प्लान में लॉक हो जाए.

PFRDA ने छोटे और मध्यम श्रेणी के निवेशकों के लिए नियमों को और भी सरल बनाया है ताकि उन्हें जबरदस्ती पेंशन प्लान न खरीदना पड़े. इसके लिए दो अलग-अलग स्लैब बनाए गए हैं. यदि कुल जमा फंड (Corpus) 8 लाख रुपये या उससे कम है, तो एन्युटी खरीदने की कोई बाध्यता नहीं होगी. पूरे के पूरे पैसे एकमुश्त निकाल सकते हैं. जिन सब्सक्राइबर्स का फंड 8 लाख से ज्यादा है लेकिन 12 लाख रुपये तक है, वे अधिकतम 6 लाख रुपये एकमुश्त निकाल सकते हैं. शेष बची हुई राशि को कम से कम 6 साल की अवधि वाली एन्युटी स्कीम में निवेश करना होगा.

85 साल की उम्र तक निवेश का मौका

PFRDA ने निवेश में बने रहने की समयसीमा भी बढ़ा दी है. नए नियमों के मुताबिक, सब्सक्राइबर्स अब 85 वर्ष की आयु तक NPS में अपना निवेश जारी रख सकते हैं. पहले कई मामलों में 70 या 75 वर्ष तक ही खाते को एक्टिव रखने की अनुमति थी. इस बदलाव का अर्थ है कि अगर किसी व्यक्ति को 60 साल की उम्र में पैसों की जरूरत नहीं है, तो वह अपने पैसे को अगले 25 साल तक और कंपाउंडिंग (चक्रवृद्धि ब्याज) का लाभ लेने के लिए छोड़ सकता है.

समय से पहले निकासी के सख्त नियम

समय से पहले (Premature) स्कीम बंद करने पर नियमों को स्पष्ट किया गया है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह एक रिटायरमेंट प्रोडक्ट ही बना रहे. यदि कोई सब्‍सक्राइबर मैच्योरिटी (60 वर्ष या 15 वर्ष की सदस्यता) से पहले स्कीम से बाहर निकलते हैं, तो उसे अपने कुल फंड का कम से कम 80% हिस्सा एन्युटी में लगाना होगा. वह केवल 20% राशि ही नकद निकाल पाएगा. यदि कुल फंड 5 लाख रुपये से कम है तो समय से पहले निकासी पर भी पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकती है.

परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए PFRDA ने क्लेम सेटलमेंट को भी स्पष्ट किया है. यदि एन्युटी खरीदने या पैसा निकालने से पहले सब्सक्राइबर की मृत्यु हो जाती है, तो जमा की गई पूरी राशि (100%) नॉमिनी या कानूनी उत्तराधिकारी को दे दी जाएगी. इसमें एन्युटी खरीदने की कोई शर्त नहीं होगी. यदि कोई सब्सक्राइबर लापता हो जाता है और कानूनन मृत मान लिया जाता है तो नॉमिनी को तुरंत राहत के तौर पर 20% राशि दी जाएगी. शेष राशि का भुगतान भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के प्रावधानों और कानूनी प्रक्रियाओं के पूरा होने पर किया जाएगा.

नागरिकता छोड़ने पर पूरा पैसा वापस

कई भारतीय दूसरे देशों में बस रहे हैं. इसे देखते हुए नए नियमों में के अनुसार यदि कोई सब्सक्राइबर अपनी भारतीय नागरिकता छोड़ देता है तो वह अपना NPS खाता बंद कर सकता है. ऐसी स्थिति में उसे पूरी जमा राशि एकमुश्त निकालने की अनुमति होगी.

क्‍या सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बदले हैं नियम?

नहीं, सरकारी कर्मचारियों के लिए नियम नहीं बदले हैं. ऊपर बताए गए नियम मुख्य रूप से गैर-सरकारी क्षेत्र (प्राइवेट और आम नागरिक) के लिए हैं. यानी इन बदलावों का असर एनपीएस में पैसा लगाने वाले सरकारी कर्मचारियों को नहीं होगा. उनके लिए 5 साल का लॉक-इन अनिवार्य रहेगा. 60 वर्ष की आयु के बाद एग्जिट पर, यदि फंड 5 लाख से अधिक है तो 40% राशि एन्युटी में जाएगी और 60% नकद मिलेगी. सरकारी कर्मचारी तभी 100% पैसा निकाल सकते हैं जब उनका कुल फंड 5 लाख रुपये से कम हो.

एनपीएस क्‍या है?

एनपीएस को जनवरी 2004 में सरकारी कर्मचारियों के लिए शुरू किया गया था. साल 2009 में इसे सभी नागरिकों के लिए खोल दिया गया. इस योजना में आप कामकाजी उम्र में नियमित पैसा लगा बड़ा फंड तो बना ही सकते हैं साथ ही पेंशन का जुगाड़ भी कर सकते हैं.रिटायरमेंट की तैयारी करने वालों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) एक ऐसा निवेश साधन है जो न केवल सुरक्षित है बल्कि टैक्स बेनिफिट भी देता है. एनपीएस सब्‍सक्राइबर्स को कई परिसंपत्तियों जैसे इक्विटी कॉरपोरेट बॉन्‍ड और गर्वनमेंट सिक्‍योरिटी में निवेश करने की सुविधा प्रदान करता है. यह ईईई श्रेणी की निवेश योजना है जिसमें जमा राशि, मैचयोरिटी पर मिलने वाली रकम और जमा राशि पर मिलने वाले ब्‍याज पर टैक्‍स छूट मिलती है.

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