बेसिक स्कूलों में पढ़ाई का तरीका बदलेगा, नई शिक्षण पद्धति लागू करने की तैयारी, शासन ने जारी किए निर्देश
शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के प्रभावी इस्तेमाल के साथ नई शिक्षण पद्धतियों को भी साझा करना होगा। बच्चों में रटने के बजाय सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता विकसित करने पर रहेगा जोर।
सहारनपुर। परिषदीय बेसिक स्कूलों में पढ़ाई के पुराने तौर-तरीकों में बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। अब विद्यालयों में बच्चों को केवल किताबी बातें याद कराने के बजाय उनकी सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए शासन ने नई शिक्षण व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने 21 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत विद्यालयों में शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और गतिविधि आधारित बनाने की योजना तैयार की गई है।
किताबों से बाहर निकलकर सीखेंगे बच्चे
नई व्यवस्था के तहत बच्चों को केवल पाठ याद कराने तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें विषयों को समझने और अपनी सोच से जवाब देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। शिक्षकों को पाठ योजना में केस स्टडी, वाद-विवाद और समस्या समाधान जैसी गतिविधियां शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
शिक्षक बच्चों से 'क्यों', 'कैसे' और 'क्या होता यदि' जैसे सवाल पूछेंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में तार्किक चिंतन, विश्लेषण और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना है।
हर महीने बदलेगा शिक्षक संकुल की बैठक का स्वरूप
शिक्षक संकुल की मासिक बैठकें अब अलग-अलग विद्यालयों में आयोजित की जाएंगी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों की बैठकें अलग-अलग होंगी।
बैठकों में शिक्षक अपने विद्यालयों में अपनाए गए बेहतर शिक्षण तरीकों, नवाचारों और सफलता की कहानियों को साझा करेंगे। इसके साथ ही पहले से तय एजेंडे के अनुसार विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा, ताकि एक विद्यालय के शिक्षक दूसरे विद्यालयों के अनुभवों से सीख सकें।
TLM के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर
शिक्षकों को शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) का प्रभावी इस्तेमाल करने के साथ नई शिक्षण पद्धतियों को भी साझा करना होगा। प्रत्येक माह के तीसरे मंगलवार को होने वाली बैठकों के लिए समय निर्धारित किया गया है।
बैठकें एक अप्रैल से 30 सितंबर तक दोपहर 12 बजे से दोपहर दो बजे तक तथा एक अक्टूबर से 31 मार्च तक दोपहर एक बजे से तीन बजे तक आयोजित होंगी। इन बैठकों का आयोजन अकादमिक सहयोग और शिक्षण गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से किया जाएगा।
निपुण लक्ष्य हासिल करने पर रहेगा फोकस
शासन के निर्देशों के अनुसार शिक्षक संकुल की बैठकों को प्रभावी बनाया जाएगा। शिक्षकों को बच्चों में सोचने, समझने और तर्क करने की क्षमता विकसित करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। साथ ही निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को हासिल करने पर विशेष जोर रहेगा।
बैठकों में डायट प्राचार्य, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक), जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी समेत संबंधित अधिकारी और अकादमिक सहयोगी शामिल होंगे।
इस नई पहल का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण की गुणवत्ता सुधारना और बच्चों को रटने की परंपरा से बाहर निकालकर समझ आधारित शिक्षा की ओर आगे बढ़ाना है।
Post a Comment