यूपी के स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान होगी आसान, एक प्लेटफार्म पर आएंगे शिक्षक-छात्र, मई में लांच की तैयारी Basic Education Department

यूपी के स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान होगी आसान, एक प्लेटफार्म पर आएंगे शिक्षक-छात्र, मई में लांच की तैयारी

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। माध्यमिक व बेसिक स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले (दिव्यांग) बच्चों की पहचान अब पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रही है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा विकसित 'प्रशस्त' एप के जरिये 21 प्रकार की विकलांगताओं की जांच सरल तरीके से की जा सकेगी।


यह दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के अनुरूप तैयार किया गया है। जो बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद करेगा। मई में इसे लांच करने की तैयारी है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय शिविर कार्यालय में मंगलवार को इस एप के प्रयोग को लेकर कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें शिक्षा मंत्रालय की उप सचिव इरा सिंघल ने बताया कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर पहचान और मूल्यांकन बेहद जरूरी है, ताकि उन्हें सही समय पर सहायता मिल सके।

प्रशस्त एप 2.0 को एनआइसी और शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिससे स्कूल प्रमुख, शिक्षक, विशेष शिक्षक और छात्र एक ही प्लेटफार्म पर जुड़ सकेंगे।

एप के माध्यम से स्कूल स्तर पर ही बच्चों की प्रारंभिक जांच संभव होगी। इसका अपग्रेड संस्करण मई में लांच होने की संभावना है। एप के प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

शिक्षक इसके माध्यम से बच्चों के व्यवहार, सामाजिक और शैक्षणिक पहलुओं का आकलन कर सकेंगे। यदि किसी बच्चे में संभावित विकलांगता के संकेत मिलते हैं, तो उसे समग्र शिक्षा योजना के तहत विशेष सहायता सेवाओं से जोड़ा जाएगा।

इस दौरान शिक्षकों और विशेष शिक्षकों से बातचीत कर एप के उपयोग के उनके अनुभव भी जाने। कार्यशाला में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, नई दिल्ली और केंद्रीय विद्यालय संगठन के करीब 100 शिक्षक और विशेष शिक्षक शामिल हुए।

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