आधार कार्ड में जन्मतिथि बदलना अब नहीं आसान, केवल विशेष परिस्थितियों में ही जन्मतिथि में होगा एक बार संशोधन
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार में जन्मतिथि बदलने के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। बार-बार बदलाव रोकने के लिए अब केवल विशेष परिस्थितियों में ही जन्मतिथि में संशोधन किया जा सकेगा।
नई दिल्ली। आधार कार्ड में जन्मतिथि (डेट ऑफ बर्थ) को बार-बार बदलने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। इसके तहत अब आधार में जन्मतिथि में संशोधन केवल विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकेगा। प्राधिकरण का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की जन्मतिथि एक ही होती है, इसलिए सामान्य परिस्थितियों में इसे बदलने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, कई मामलों में आधार नामांकन के दौरान ऑपरेटर की त्रुटि, अनुमानित जानकारी दर्ज होने या गलत दस्तावेज देने के कारण जन्मतिथि गलत दर्ज हो जाती है। ऐसे मामलों में ही सुधार की अनुमति दी जाएगी, वह भी तब जब संबंधित व्यक्ति के पास प्रमाणित और सत्यापन योग्य दस्तावेज उपलब्ध हों।
यूआईडीएआई का उद्देश्य आधार डाटाबेस की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है, ताकि नागरिकों की पहचान से जुड़ी जानकारी पूरी तरह सही और प्रमाणिक बनी रहे। नया नियम 24 दिसंबर 2025 से हो गया प्रभावी।
जन्म प्रमाण पत्र को मिलेगा सबसे अधिक महत्व
यूआईडीएआई के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र को सबसे अधिक मान्य और कानूनी दस्तावेज माना गया है। यदि किसी आधार धारक ने पहले ही जन्म प्रमाण पत्र को जन्मतिथि के प्रमाण के रूप में जमा कर दिया है, तो सामान्य परिस्थितियों में दोबारा जन्मतिथि में बदलाव की अनुमति नहीं दी जाएगी।
बच्चों के लिए भी नई व्यवस्था लागू की गई है। पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों के आधार नामांकन के लिए जन्म प्रमाण पत्र अनिवार्य दस्तावेज होगा। वहीं, पांच से 18 वर्ष के बच्चों के लिए डिजिटल रूप से सत्यापित जन्म प्रमाण पत्र को स्वीकार किया जाएगा।
यदि किसी महिला ने विवाह के बाद अपना नाम बदल लिया है और उसके साथ जन्मतिथि में भी सुधार की आवश्यकता है, तो विवाह प्रमाण पत्र या पुराने और नए नाम वाले आधार दस्तावेज जैसे प्रमाण स्वीकार किए जा सकते हैं।
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