परिषदीय स्कूलों में जर्जर शौचालयों पर उठी आवाज, अलग बजट और जवाबदेही के साथ शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था करने की PSPSA ने रखी मांग
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन,PSPSA (उत्तर प्रदेश) ने परिषदीय विद्यालयों में जर्जर और अपर्याप्त शौचालयों की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के साथ-साथ उच्च न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया है। संगठन ने पत्र के माध्यम से कहा है कि प्रदेश के अनेक परिषदीय विद्यालयों में आज भी छात्र-छात्राएं और शिक्षक जर्जर शौचालयों का उपयोग करने को मजबूर हैं, जबकि कई स्थानों पर बच्चों को खुले में जाने की स्थिति बनी हुई है, जो गंभीर स्वास्थ्य और सुरक्षा चिंता का विषय है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि विभागीय स्तर पर कागजों में अधिकांश विद्यालयों को शौचालययुक्त और सुरक्षित दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे अलग है। संगठन का आरोप है कि जिला स्तर पर शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों पर दबाव बनाकर जर्जर शौचालयों को कागजी रूप से सुरक्षित दर्शाया जा रहा है, जिससे भविष्य में किसी दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि अधिकारियों द्वारा शौचालय निर्माण के लिए अलग बजट देने के बजाय कंपोजिट ग्रांट की सीमित राशि (लगभग 25 हजार रुपये) से निर्माण कराने का निर्देश दिया जा रहा है। संगठन का तर्क है कि इतनी कम राशि में शौचालय निर्माण संभव नहीं है और यदि विद्यालय यह राशि निर्माण में खर्च करते हैं तो रंगाई-पुताई, मरम्मत, शिक्षण सामग्री, परीक्षा व्यवस्था जैसे अन्य आवश्यक कार्य प्रभावित हो जाएंगे।
पत्र में यह भी चिंता जताई गई है कि आजादी के दशकों बाद भी कई विद्यालयों में शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं की कार्य परिस्थितियों को लेकर इसे संवेदनशील मुद्दा बताया गया है और कहा गया है कि यह केवल सुविधा नहीं बल्कि गरिमा और मानवाधिकार से जुड़ा विषय है।
संगठन ने मांग की है कि परिषदीय विद्यालयों में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग सुरक्षित शौचालयों के निर्माण हेतु अलग से पर्याप्त बजट जारी किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों द्वारा बिना भौतिक सत्यापन के विद्यालयों को सुरक्षित घोषित किया जा रहा है, उनके स्तर पर भी जवाबदेही तय की जाए। एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना या स्वास्थ्य संकट का कारण बन सकती है।
संगठन ने सरकार और प्रशासन से इस मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की अपील करते हुए कहा है कि स्वच्छ और सुरक्षित विद्यालय वातावरण ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बुनियादी शर्त है।
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