काउंसलिंग में शिक्षकों का हंगामा, समायोजन निरस्त करने की मांग
जिले में समायोजन प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों का गुस्सा फिर से उबाल पर है। समायोजन में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए शिक्षकों ने मंगलवार को विकास भवन में काउंसलिंग स्थल पर हंगामा किया और समायोजन को निरस्त करने की मांग की।
शिक्षकों का कहना है कि समायोजन में कई अनियमितताएं बरती गई हैं। विशेषकर पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में विषयवार असंतुलित समायोजन, यू-डायस पोर्टल पर विद्यालय परिवर्तन और शीतकालीन अवकाश के दौरान शिक्षकों से अभिलेख मांगने को उन्होंने उत्पीड़न करार दिया। शिक्षकों का आरोप है कि यदि समायोजन 3.0 को शासन के निर्देशों के अनुसार पारदर्शी तरीके से लागू नहीं किया गया तो वे आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।
शिक्षकों ने बताया कि कई विद्यालयों में समायोजन प्रक्रिया गलत तरीके से की गई। जहां छात्रों की संख्या कम थी, वहां अधिक संख्या में शिक्षक तैनात कर दिए गए और कुछ स्कूलों में छात्र संख्या ज्यादा थी, वहां शिक्षकों का समायोजन नहीं किया गया। इसके अलावा, एकल विद्यालयों की वास्तविक संख्या को छिपाकर रखा गया, जिससे उनकी स्थिति सही ढंग से सामने नहीं आई। शिक्षकों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर समायोजन प्रक्रिया को शासनादेश के अनुरूप करने की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा कि विकलांग और गंभीर बीमारी से ग्रस्त शिक्षकों को समायोजन से मुक्त रखा जाए, साथ ही एसआईआर में तैनात शिक्षकों को भी इस प्रक्रिया से बाहर किया जाए। शिक्षकों का कहना है कि विकास भवन में काउंसलिंग के दौरान अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया बल्कि दबाव बनाकर स्वीकृत कराया गया और वह इससे संतुष्ट नहीं है। -वर्जन विभाग द्वारा स्कूलों की स्थिति को देखते हुए आवश्यकतानुसार समायोजन किया गया है। कुछ शिक्षक इच्छा के अनुसार स्कूल चाहते है, लेकिन स्वेच्छा अनुसार स्कूल ना मिलने पर आपत्ति जता रहे है। -कोमल चौधरी, बीएसए
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