SCERT: पांच मानकों पर होगी परिषदीय विद्यालयों की ग्रेडिंग, सत्र 2026-27 से लागू हो सकती है व्यवस्था

SCERT: पांच मानकों पर होगी परिषदीय विद्यालयों की ग्रेडिंग, सत्र 2026-27 से लागू हो सकती है व्यवस्था

लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत परिषदीय विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश के विद्यालयों को गुणवत्ता समेत पांच प्रमुख मानकों के आधार पर परखा जाएगा। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा School Quality Assessment and Accreditation Framework (SQAAF) विकसित किया जा रहा है।


NEP 2020 के तहत शुरू हुई नई मूल्यांकन व्यवस्था

एनईपी 2020 के प्रावधानों के अनुसार स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक राज्य में State School Standards Authority (SSSA) की स्थापना की जा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में SCERT के अंतर्गत SSSA का गठन कर दिया गया है। अब इसी संस्था के माध्यम से SQAAF फ्रेमवर्क को लागू किया जाएगा।



यह फ्रेमवर्क स्कूलों के कामकाज, शैक्षणिक गुणवत्ता और बुनियादी ढांचे का समग्र आकलन करेगा, जिससे कमजोरियों की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सके।


पांच मानकों पर होगा स्कूलों का मूल्यांकन

SCERT के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान के अनुसार, SQAAF के अंतर्गत विद्यालयों का मूल्यांकन निम्न पांच प्रमुख पैरामीटर पर किया जाएगा—

  1. विद्यालय का ढांचागत विकास
  2. शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की स्थिति
  3. पठन-पाठन एवं शिक्षण की गुणवत्ता
  4. आवश्यक शैक्षणिक संसाधन
  5. विद्यालय प्रबंधन एवं प्रशासनिक व्यवस्था

इन बिंदुओं के आधार पर होगी ग्रेडिंग

SQAAF के तहत स्कूलों की ग्रेडिंग निम्न पहलुओं को ध्यान में रखकर की जाएगी—

  • कक्षा-कक्षों की स्थिति
  • छात्रों का नामांकन और उपस्थिति
  • स्मार्ट क्लास और डिजिटल संसाधन
  • शौचालय एवं स्वच्छता व्यवस्था
  • मिड-डे मील यूनिट
  • निपुण भारत के तहत छात्र मूल्यांकन

इन सभी बिंदुओं के आधार पर स्कूलों को ग्रेड दिया जाएगा और उसी अनुसार सुधारात्मक कार्यवाही की जाएगी।


सत्र 2026-27 सत्र से लागू हो सकती है व्यवस्था

उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य हो सकता है, जहां SQAAF को प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा। फिलहाल यह व्यवस्था किसी भी अन्य राज्य में लागू नहीं है। विभाग इसे नए शैक्षिक सत्र 2026-27 से पहले लागू करने की तैयारी कर रहा है।


बैगलेस डे जैसी पहलें भी हो रहीं लागू

एनईपी के अंतर्गत इस सत्र से स्कूलों में बैगलेस डे की व्यवस्था भी लागू की गई है।

  • हर महीने के अंतिम शनिवार को बच्चे बिना बैग स्कूल आएंगे
  • गतिविधियों, खेलकूद और व्यावहारिक शिक्षा पर फोकस रहेगा
  • वर्तमान सत्र में इसे 10 दिनों के लिए लागू किया गया है

SQAAF फ्रेमवर्क के माध्यम से विद्यालयों की गुणवत्ता को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि विद्यालयों में पारदर्शिता, जवाबदेही और निरंतर सुधार की संस्कृति भी विकसित होगी।



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