उत्तर प्रदेश में अब बच्चे का आधार नहीं, अभिभावक के आधार से होगा दाखिले का आवेदन
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ: निश्शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी विद्यालयों में प्री-नर्सरी और कक्षा एक में दाखिले की प्रक्रिया अब और आसान कर दी गई है।
आवेदन के समय अब बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य नहीं होगा। अभिभावक अपने आधार कार्ड के आधार पर ही आवेदन कर सकेंगे।
बेसिक शिक्षा विभाग ने इसके लिए नियमों में संशोधन करते हुए नया आदेश जारी कर दिया है। तकनीकी दिक्कतों को दूर कर लिया गया है। आरटीई के तहत प्री-नर्सरी और कक्षा एक में प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
दरअसल, पिछले वर्ष आठ सितंबर को जारी शासनादेश में आरटीई आवेदन के लिए बच्चे और अभिभावक दोनों का आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया था। इससे अलाभित समूह और दुर्बल वर्ग के बच्चों का आधार बनवाने में दिक्कतें आ रही थीं। इसके साथ ही आवेदन के दौरान दस्तावेजों का आनलाइन सत्यापन भी बाधित हो रहा था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने बच्चे के आधार की अनिवार्यता समाप्त कर दी है।
अब आवेदन पत्र में माता या पिता में से किसी एक का आधार नंबर दर्ज करना होगा। साथ ही, पहले प्रवेश से पहले अपार आईडी बनाना अनिवार्य था, जिसे पूरा न करने पर स्कूलों की शुल्क प्रतिपूर्ति रोक दी जाती थी। नए आदेश में अपार आइडी बनाने की बाध्यता भी खत्म कर दी गई है। इससे निजी विद्यालयों को शुल्क प्रतिपूर्ति में आने वाली परेशानी भी दूर होगी। निवास प्रमाण पत्र को लेकर भी नियमों में ढील दी गई है।
अब तहसीलदार कार्यालय से जारी निवास प्रमाण पत्र के अलावा मतदाता परिचय पत्र, राशन कार्ड, ग्रामीण क्षेत्रों में जाब कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, बिजली बिल और पानी का बिल भी मान्य होंगे। नए प्रविधानों के अनुसार, प्रवेश के बाद विद्यालय आरटीई पोर्टल पर छात्र का विवरण दर्ज करेंगे।
बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी स्तर पर सत्यापन के बाद विद्यालयों को शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान कर दिया जाएगा। गुरुवार को अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
सात सदस्यीय समिति करेगी निगरानी
जनपद स्तर पर आरटीई के क्रियान्वयन और निगरानी के लिए बनी समिति का पुनर्गठन किया गया है। अब 11 की जगह सात सदस्यीय समिति होगी। जिलाधिकारी की अध्यक्षता में इस समिति में मुख्य विकास अधिकारी, अपर जिलाधिकारी, जिला विद्यालय निरीक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी, वित्त एवं लेखाधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी शामिल होंगे। पहले शामिल चिकित्साधिकारी, समाज कल्याण अधिकारी, उप जिलाधिकारी और दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी को समिति से हटा दिया गया है। वहीं, मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में बनी विवाद समाधान समिति का प्रविधान भी समाप्त कर दिया गया है। अब एक ही समिति पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगी।
67 हजार विद्यालयों में होगा प्रवेश
निजी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। प्रदेश में लगभग 68 हजार विद्यालयों की आरटीई पोर्टल पर मैपिंग की गई है और करीब एक लाख 80 हजार सीटें निर्धारित हैं। पिछले वर्ष एक लाख 40 हजार से अधिक बच्चों को आरटीई के तहत प्रवेश मिला था। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि विद्यालयों का नया सत्र शुरू होने से पहले प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। पहले की तरह www.rte25.upsdc.gov.in पोर्टल पर आवेदन होंगे। नर्सरी में प्रवेश के समय तीन से चार वर्ष, एलकेजी में चार से पांच वर्ष, यूकेजी में पांच से छह वर्ष और कक्षा एक छह से सात वर्ष से कम होने चाहिए।
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