इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह बात दोहराई है कि प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का अधिकार नहीं होता और ऐसी सूची अनिश्चित समय के लिए नहीं रखी जा सकती। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शरण शर्मा की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ नीरा चौबे समेत चार अन्य की याचिकाएं खारिज कर दीं।
याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की तरफ से जारी विज्ञापन संख्या 01/2016 के तहत शुरू की गई चयन प्रक्रिया में भाग लिया था। इस भर्ती में प्रदेश के सहायता प्राप्त हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों में असिस्टेंट टीचर (एलटी ग्रेड) की नियुक्ति के लिए 22 अलग-अलग विषयों के कुल 7950 पद थे।
कोर्ट ने माना कि चयन सूची जारी होने के बाद सभी खाली पदों को भरना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों को स्वतः नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतीक्षा सूची सीमित अवधि के लिए होती है और उसे अनिश्चित काल तक जीवित नहीं रखा जा सकता।

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