अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती, सरकार से मांगा गया जवाब Aided Junior High School

अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों की नियुक्ति प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती, सरकार से मांगा गया जवाब

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापकों की नियुक्ति प्रक्रिया को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। चयन परीक्षा 2021 में सफल अभ्यर्थियों ने इस संबंध में याचिका दाखिल की है, जिसमें नियुक्ति के लिए अपनाई जा रही प्रक्रिया को नियमों के विपरीत बताया गया है।


कृपाशंकर सहित 50 अन्य अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने राज्य सरकार से तीन दिन के भीतर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी को निर्धारित की गई है।

आरक्षण नियमों के उल्लंघन का आरोप

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी द्वारा जारी विज्ञापन, शिक्षा निदेशक (बेसिक) के 3 नवंबर 2025 के सर्कुलर और काउंसलिंग के लिए जारी अनंतिम सूची में ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज आरक्षण का पालन नहीं किया गया है। आरोप है कि अनुसूचित जाति को 21 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 2 प्रतिशत, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत और 10 प्रतिशत आरक्षण के साथ-साथ दिव्यांगों, महिलाओं और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों को क्षैतिज आरक्षण नहीं दिया गया, जिससे कई योग्य अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित हो रहे हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि विज्ञापन में रिक्त पदों और आरक्षित पदों का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया, जो आरक्षण नीति का सीधा उल्लंघन है। जबकि 30 दिसंबर 2025 को प्रदेश सरकार ने सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों और सचिवों को निर्देश जारी कर आरक्षण मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा था।

नियुक्ति प्रक्रिया पर भी उठे सवाल

इसके बावजूद, निदेशक बेसिक शिक्षा ने अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के विभिन्न विषयों के लिए काउंसलिंग और अभिलेख परीक्षण की अनंतिम सूची जारी कर दी। अंतिम तिथि 15 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। 2 जनवरी तक सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों से सूची मांगी गई है और इसके बाद 30 जनवरी से नियुक्ति पत्र जारी करने की घोषणा भी कर दी गई है।

याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला ने बताया कि पिछली सुनवाई में प्रतिवादियों से लिखित जवाब मांगा गया था। मंगलवार को सुनवाई के दौरान मुख्य स्थायी अधिवक्ता सप्तम आशुतोष कुमार श्रीवास्तव ने समय की मांग की, जिस पर कोर्ट ने उन्हें तीन दिन का अंतिम अवसर प्रदान किया।

भूतपूर्व सैनिकों ने भी दी चुनौती

इस मामले में भूतपूर्व सैनिकों ने भी अलग से याचिका दाखिल की है। नागेंद्र पाण्डेय और 17 अन्य की ओर से दायर याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा ने कोर्ट को बताया कि उत्तर प्रदेश लोक सेवा (शारीरिक रूप से विकलांग, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित और भूतपूर्व सैनिक) आरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत 5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया है।

हाईकोर्ट ने इस याचिका पर भी सुनवाई करते हुए प्रतिवादी पक्ष को तीन दिन के भीतर लिखित निर्देश दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है।

Post a Comment

Previous Post Next Post