यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी पुस्तकें अनिवार्य, महंगी गाइड बुक थोपने पर 5 लाख तक जुर्माना
जागरण संवाददाता, अलीगढ़। यूपी बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में अब केवल एनसीईआरटी की अधिकृत पाठ्य पुस्तकों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। छात्रों को महंगी, अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें या गाइड बुक खरीदने के लिए बाध्य करने वाले विद्यालयों पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाया जाएगा।
जरूरत पड़ने पर विद्यालय की मान्यता निलंबित या निरस्त भी की जा सकती है।
बोर्ड के अनुसार कक्षा नौ से 12 तक के 36 विषयों की कुल 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें शैक्षिक सत्र शुरू होने के पहले (फरवरी में ही) सप्ताह तक बिक्री के लिए उपलब्ध करा दी जाएंगी। इसके लिए अधिकृत प्रकाशकों को सख्त दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
| NCERT BOOKS FOR UP BOARD |
35 राजकीय, 95 एडेड व 600 से अधिक वित्तविहीन विद्यालय जनपद में संचालित
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौ से 12 तक की पढ़ाई को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी आदेश में साफ कहा गया है कि अधिकृत प्रकाशकों के अलावा किसी अन्य की पाठ्यपुस्तकों से पढ़ाई नहीं कराई जाएगी। साथ ही किसी भी प्रकार की गाइड बुक, संदर्भ पुस्तक या अधिक मूल्य वाली किताबें छात्रों पर थोपना दंडनीय होगा। यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ जुर्माने के साथ-साथ मान्यता के निलंबन, मान्यता वापसी या अन्य कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
पाइरेसी-डुप्लीकेसी पर रहेगी नजर, उल्लंघन पर जुर्माना व सजा
सचिव ने स्पष्ट किया है कि यूपी बोर्ड के पास इन पुस्तकों का कापीराइट है, इसलिए पाइरेसी और डुप्लीकेसी पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। कोई भी अनधिकृत मुद्रक यदि यूपी बोर्ड की किताबों की छपाई या बिक्री करता है, या कोई दुकानदार नकली अथवा अधिक मूल्य पर पाठ्य पुस्तकें बेचता है, तो उसके खिलाफ पुलिस, प्रशासन, वाणिज्य कर और आयकर विभाग के साथ मिलकर जांच कराई जाएगी। कापीराइट उल्लंघन साबित होने पर छह महीने से तीन साल तक की सजा और 50 हजार से दो लाख रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है।
अधिकृत प्रकाशकों की जिम्मेदारी तय
बोर्ड ने पुस्तकों की छपाई के लिए अधिकृत प्रकाशकों का भी निर्धारण कर दिया है। कक्षा नौ और 12 की किताबें पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स, आगरा छापेगा। कक्षा 10 की जिम्मेदारी पीताम्बरा बुक्स, बिजौली (झांसी) को दी गई है, जबकि कक्षा 11 की किताबें सिंघल एजेंसीज, लखनऊ द्वारा प्रकाशित की जाएंगी। बोर्ड ने अधिकृत प्रकाशक मंडल के अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, एटा समेत प्रदेश के सभी 75 जिलों में थोक और फुटकर विक्रेताओं के माध्यम से किताबें उपलब्ध कराएंगे। यदि किसी जिले में किताबें समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती हैं तो संबंधित प्रकाशक के खिलाफ कार्रवाई होगी।
विभाग का मानना है कि इन कदमों का मकसद छात्रों और अभिभावकों को आर्थिक शोषण से बचाना, शिक्षा में पारदर्शिता लाना है और विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना है। जनपद में 35 राजकीय विद्यालय, 95 एडेड विद्यालय व 600 से अधिक वित्तविहीन विद्यालय संचालित हैं। वित्तविहीन ही नहीं, अन्य विद्यालयों में भी यह समस्या सामने आई है।
बाजार में एनसीईआरटी की पर्याप्त पुस्तकें होते हुए भी शिक्षक या विद्यालय स्तर से गाइड और संदर्भ पुस्तकें अनिवार्य कर दी जाती थीं। बोर्ड का फैसला सराहनीय है। - गोपाल सिंह, क्वार्सी।
सस्ती और अच्छी किताबों से पढ़ाई होगी तो गरीब अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी। बच्चों को किताबें पढ़ाने की बजाय गाइड व अन्य पुस्तकें मंगाई जाती हैं। - गिरीश कुमार, पला साहिबाबाद।
शैक्षिक सत्र 2026-27 से एनसीईआरटी की अधिकृत पाठ्यपुस्तकों को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। बोर्ड का उद्देश्य शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण और किफायती बनाना है। अभिभावकों से अपील की कि यदि किसी स्कूल या दुकानदार द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें, ताकि त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। - मनोज गिरी, संयुक्त शिक्षा निदेशक (माध्यमिक)
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