ITR फाइलिंग को लेकर 5 बड़े भ्रम: TDS से लेकर गिफ्ट तक, इन गलतफहमियों से बचेंगे तो बचेगा टैक्स

ITR फाइलिंग को लेकर 5 बड़े भ्रम: TDS से लेकर गिफ्ट तक, इन गलतफहमियों से बचेंगे तो बचेगा टैक्स

नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना हर साल लाखों करदाताओं के लिए जरूरी प्रक्रिया है. वित्त वर्ष 2024-25 के लिए ITR फाइलिंग का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद टैक्स को लेकर कई तरह की गलतफहमियां अब भी बनी हुई हैं.

सोशल मीडिया पर फैली अधूरी जानकारी और गैर-भरोसेमंद सलाह के चलते लोग अक्सर गलत फैसले ले लेते हैं. समय रहते इन मिथकों की सच्चाई जान लेना न सिर्फ टैक्स बचाने में मदद करता है, बल्कि भविष्य की परेशानियों से भी बचाता है.


मिथक 1: अगर सैलरी से TDS कट रहा है तो ITR फाइल करना जरूरी नहीं
कई सैलरीड कर्मचारी मानते हैं कि जब कंपनी पहले ही TDS काट रही है, तो उन्हें ITR भरने की जरूरत नहीं है. जबकि सच्चाई यह है कि TDS सिर्फ टैक्स की अग्रिम वसूली है. अगर आपकी कुल आय छूट की सीमा से ज्यादा है, तो ITR फाइल करना आपकी जिम्मेदारी है. ITR के जरिए ही आप रिफंड क्लेम कर सकते हैं और भविष्य के लिए नुकसान (Loss) को कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं.

मिथक 2: सिर्फ अमीर लोगों को ही इनकम टैक्स देना पड़ता है
यह सबसे आम और गलत धारणा है. इनकम टैक्स का संबंध अमीरी से नहीं, बल्कि आपकी सालाना आय से है. फ्रीलांसर, छोटे कारोबारी, निवेश से कमाई करने वाले या साइड इनकम वाले लोग भी टैक्स के दायरे में आ सकते हैं. अगर आपकी कुल आय तय सीमा से ऊपर है, तो आपको टैक्स देना और ITR फाइल करना जरूरी है.

मिथक 3: आखिरी तारीख निकल गई तो ITR फाइल नहीं हो सकता
बहुत से लोग मानते हैं कि ड्यू डेट निकलने के बाद ITR भरने का कोई विकल्प नहीं बचता. जबकि ऐसा नहीं है. अगर आप तय तारीख (आमतौर पर 31 जुलाई) तक ITR फाइल नहीं कर पाए, तो भी आप 31 दिसंबर तक लेट ITR फाइल कर सकते हैं. हालांकि, इसमें जुर्माना और ब्याज देना पड़ सकता है. इसलिए देर जरूर हो सकती है, लेकिन मौका खत्म नहीं होता.

मिथक 4: परिवार या दोस्तों से मिला हर गिफ्ट टैक्सेबल होता है
गिफ्ट को लेकर भी लोगों में काफी भ्रम है. आयकर कानून के अनुसार, माता-पिता, भाई-बहन या जीवनसाथी जैसे नजदीकी रिश्तेदारों से मिला गिफ्ट पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है, चाहे रकम कितनी भी हो. वहीं गैर-रिश्तेदार से मिला गिफ्ट अगर साल में 50 हजार रुपये से ज्यादा है, तो पूरी राशि टैक्सेबल हो जाती है. इसलिए गिफ्ट की टैक्स स्थिति समझना बेहद जरूरी है.

मिथक 5: टैक्स सेविंग निवेश करना जरूरी नहीं है
यह सच है कि टैक्स सेविंग निवेश करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना नुकसानदेह हो सकता है. सेक्शन 80C के तहत PPF, ELSS, LIC प्रीमियम जैसे विकल्पों में निवेश करके आप 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट पा सकते हैं. अगर सही समय पर प्लानिंग न की जाए, तो आपको जरूरत से ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है. इनकम टैक्स से जुड़े नियम जटिल लग सकते हैं, लेकिन सही जानकारी होने पर ITR फाइलिंग आसान हो जाती है. अफवाहों और अधूरी सलाह पर भरोसा करने के बजाय आधिकारिक स्रोतों या टैक्स एक्सपर्ट से जानकारी लेना ही समझदारी है.

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